‘गजवा-ए-हिंद’ पर विरोधियों को योगी का जवाब, कहा- जो भाषा समझते ये लोग, वही की इस्तेमाल

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इन दिनों प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी काफी एक्टिव दिखाई दे रहे हैं। इस बार वे न केवल चुनावों में हिस्सा लेकर, गोरखपुर से चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि चुनावी मैदान में आकर विपक्षियों को मुंहतोड़ जवाब भी दे रहे हैं। हाल ही में उनके द्वारा दिए गए कई बयानों पर विपक्षी हमलावर हुए थे। इन्हीं में से एक बयान था, “गजवा-ए-हिंद का उनका जो सपना है, वह कयामत के दिन तक पूरा नहीं होने वाला है।”

इस बयान को लेकर कई विपक्षी दलों ने सीएम योगी की भाषाशैली को लेकर सवाल उठाया था। ऐसे में सीएम योगी ने जवाब दिया है कि जिसकों जिस भाषा में समझ में आता है, उसे उसी भाषा में समझाना पड़ता है। बता दें, सीएम योगी ने यह झांसी में एक जनसभा के दौरान मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर कहीं।

खबरों के मुताबिक़ यह पूछे जाने पर कि आपके विरोधी कह रहे हैं कि आप प्रचार में गजवा-ए-हिंद को क्यों ले आए, क्या जरूरत पड़ गई? उन्होंने बताया, “जो जिस प्रकार की भाषा से समझेगा, उसे उसी प्रकार समझाना पड़ेगा। ऐसे में जिन लोगों ने उस भाषा का इस्तेमाल किया था, इसलिए कहा गया कि ‘गजवा-ए-हिंद’ का उनका जो सपना है, वह कयामत के दिन तक पूरा नहीं होने वाला है।”

वहीं पिछले पांच सालों में कोई काम अधूरा तो नहीं रहा गया?  इस सवाल पर सीएम का जवाब आया देखिए, हम कोई काम अधूरा नहीं छोड़ते।

बकौल योगी, “आज पूर्णिमा (माघ पूर्णिमा) है…हम पूरा काम करते हैं। हमारा मंत्र (सुनाकर बताया) भी पूरे का है…। हम पूर्णतः में विश्वास करते हैं, अधूरे में नहीं।”

योगी के मुताबिक, भारत की व्यवस्था पीएम मोदी के नेतृत्व में, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की परिकल्पना को प्रधानमंत्री ने साकार किया है और भारत दुनिया की नंबर-1 अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है और बनकर रहेगा।

दरअसल, यह काफी पुराना शब्द है। इस्लाम में गजवा-ए-हिंद का मतलब सामान्यतः काफिरों को जीत के लिए की गई एक जंग के लिए किया जाता था। मामले से जुड़े जानकारों के मुताबिक, जब भारत में इस्लाम को फैलाने का प्रयास किया गया था, तब इसके लिए गजवा-ए-हिंद शब्द का इस्तेमाल किया गया था।

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