योगी ने किया SGPGI में इमरजेंसी मेडिसिन और किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर का लोकार्पण

लखनऊ। शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसजीपीजीआई में इमरजेंसी मेडिसिन और किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर का शुभारम्भ किया। इस दौरान उन्होंने यह भी ऐलान किया कि भविष्य में वह यहां करीब 500 करोड़ की लागत से एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर भी तैयार कराएंगे। ताकि भाविष्य में यहां किडनी की समस्या से पीड़ित लोगों के इलाज के साथ ही बच्चों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का भी आसानी से इलाज किया जा सके।

खबरों के मुताबिक़ शनिवार को सीएम योगी ने एसजीपीजीआई में इमरजेंसी मेडिसिन और किडनी ट्रांसप्लाट सेंटर का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने एसजीपीजीआई में लगभग 500 करोड़ की लागत से एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर बनाने की घोषणा की।

वहीं मुख्यमंत्री ने इस दौरान 601 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं को प्रदेश की जनता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि 25 मार्च 2020 से अबतक कोविड प्रबंधन स्वयं देखता रहा। प्रदेश सरकार ने कोरोना की पहली दो लहरों में बेहतरीन काम किया। एसजीपीजीआई का इसमें अहम योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि अतीत की उपलब्धियों के साथ भावी योजनाओं के लिए ही वर्तमान होता है। इस हिसाब से एसजीपीजीआई ने अपने वर्तमान के साथ न्याय किया है। वह गौरवशाली अतीत के साथ वर्तमान की उपलब्धियों पर गर्व कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें समय के अनुरूप तैयार होना होगा। इमरजेंसी मेडिसिन और किडनी ट्रांसप्लाट सेंटर का तीन वर्ष पहले शिलान्यास हुआ था तो मुझे लगा था कि इसके बनने में समय लगेगा, लेकिन कोरोना के बावजूद एक समय सीमा में सेंटर बनकर तैयार हो गया और आज इसका आज लोकार्पण हो रहा है। यह अपने आप में उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के लगभग 50 हजार लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है। इससे इन लोगों को काफी मदद मिलेगी। एसजी पीजीआई ने आज एक नया मानक स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने चिकित्सा क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में चिकित्सा का बुनियादी ढांचा एक चुनौती की तरह था। केवल 12 मेडिकल कालेज ही बन पाए थे। आज हम लोग हर जनपद में मेडिकल कालेज बनाने की ओर अग्रसर हैं।

उन्होंने योजनाओं के लटकने का जिक्र करते हुए कहा कि हम लोगों ने उन परियोजनाओं को चार वर्ष में पूरा किया जो 40 साल में पूरी नही हो पाई थीं। सरयू नहर परियोजना और बाण सागर परियोजना इसके उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कालेज की स्थिति बेहद खराब थी और इंसेफलाइटिस से पीड़ित बड़ी संख्या में बच्चे भर्ती होती थे। मैंने पूछा तो पता चला कि 1977 से इस बीमारी से पूर्वी उत्तर प्रदेश के बच्चे मर रहे थे, लेकिन किसी भी सरकार ने इसका समाधान निकालने का प्रयास नहीं किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button