वक्फ बोर्ड पर घूमी योगी सरकार की सुई, मदरसों को लेकर भी कह दी ये बड़ी बात

लखनऊ दोबारा प्रदेश की सत्ता में वापसी के बाद जहां सीएम योगी लगातार एक्शन फॉर्म में अवैध कब्जों और निर्माण को अंजाम देने वालों पर नकेल कसने में जुटे हुए हैं। वहीं उनके मंत्री भी इस काम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते नजर आ रहे हैं। इस कड़ी में अब योगी सरकार की सुई वक्फ बोर्ड की तरफ घूमती हुई नजर आ रही है।

दरअसल, सोमवार को योगी की सरकार में पशुधन, दुग्ध विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने धर्मपाल सिंह ने बड़ा बयान दिया। इस बयान में उन्होंने कहा कि जल्द ही योगी का बुल्डोजर वक्फ बोर्ड द्वारा अवैध कब्जा की गई जमीनों पर चलेगा। वहीं उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अब से प्रदेश में कवर वही मदरसे चलेंगे, जिनमें आतंक की शिक्षा न दी जाती हो।

खबरों के मुताबिक़ मीडिया से बातचीत के दौरान धर्मपाल सिंह ने कहा, “वक्फ बोर्ड की जमीनों पर माफियाओं का कब्जा है। उसको हम छुड़वाने का काम करेंगे। बुल्डोजर भी चलेगा।”

मदरसों को लेकर उन्होंने कहा, “मदरसों में कोई राष्ट्रीय शिक्षा देगा। राष्ट्रहित की बात करेगा। आतंकवादियों की शिक्षा नहीं होगी। कॉमर्शियल शिक्षा देंगे तो हम उसके बारे में विचार करेंगे।”

उन्होंने कहा कि यहां अब तकनीकि शिक्षा दी जाएगी। यहां के छात्रों को देशभक्ति और राष्ट्रवाद की शिक्षा दी जाएगी।

धर्मपाल सिंह ने गायों को लेकर कहा, “उत्तर प्रदेश का किसान और सड़कों पर चलने वाला आमजन परेशान है। दोनों के सामने समस्या है। गायों के पास समस्या है कि वह किसानों के खेत में खाने न जाए तो कहां जाए। किसान के सामने समस्या है कि वह अपनी खेत की रखवाली न करे तो उसके बच्चे क्या खाएंगे? हमने दोनों की समस्या का निराकरण करने का तय किया है।”

धर्मपाल सिंह ने आगे कहा, “पहले हम गायों को सरंक्षण करने का स्थान देंगे। हर न्यायपंचायत स्तर पर गौशाला बनाएंगे। इनमें गायों को छुट्टा नहीं रखेंगे। इनको खूटे से बांधकर रखेंगे। इनमें अच्छी नस्ल की गाय भी पलवाएंगे। हर गौशाला अपने संसाधन से चले हम इसका प्रयास करेंगे।”

धर्मपाल सिंह ने आगे कहा कि गायों के साथ अल्पसंख्यकों का भी संरक्षण करना है, जबकि दोनों एक दूसरे के विपरित हैं।

उन्होंने कहा, “अब कैसी विडंबना है हमें गायों का भी संरक्षण करना है और अल्पसंख्यक लोगों की भी चिंता करनी है। दोनों विपरित विभाग हैं। यानी गायों का भी संरक्षण करना है और अल्पसंख्यकों की भी चिंता करनी है।”

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