चाचा-भतीजे के रिश्ते पर भारी पड़ेगी भाजपा की चाशनी? टूटकर बिखर जाएंगे अखिलेश के सपने!

लखनऊ। हाल ही में हुए यूपी विधानसभा चुनावों से पूर्व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख शिवपाल को अपने खेमें में लाने की भाजपा की कवायद सर्वविदित है।  उस वक्त जब भाजपा पार्टी में मुलायम सिंह के छोटे बेटे की बहू अपर्णा यादव के शामिल होने की खबर सामने आई तो इस बात की भी अटकलें तेज हो गई थीं कि शिवपाल भी जल्द ही भाजपा में एंट्री ले सकते हैं। मगर, ऐसा हुआ नहीं। अब एक बार फिर वहीं सियासी पेंच कसाव बनाता दिख रहा है।

बीते विधानसभा चुनावों में अखिलेश ने जिस प्रकार अपने आपसी मन-मुटाव को किनारे कर चाचा शिवपाल का साथ पकड़ा था, उसका असर चुनावी परिणामों में साफ झलक दे गया। इसके बावजूद अखिलेश अपने पुराने इतिहास को दोहराते हुए अखिलेश चाचा शिवपाल से रिश्ते बनाए रखने में नाकाम साबित हुए। यही वजह है कि एक बार फिर भाजपा में शिवपाल की एंट्री की चर्चा जोर पकड़ने लगी है।

वहीं सोमवार को शिवपाल सिंह यादव ने सुबह रामायण की चौपाई के साथ भगवान राम को परिवार, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की सर्वोत्तम पाठशाला बताया है। शिवपाल यादव की ओर से इसे भाजपा में जाने का एक और संकेत माना जा रहा है।

दरअसल, शिवपाल ने ट्वीट किया, ”प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥ आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥ भगवान राम का चरित्र ‘परिवार, संस्कार और राष्ट्र’ निर्माण की सर्वोत्तम पाठशाला है।

इसके अलावा खास यह है कि दो दिन पहले ही पीएम मोदी और सीएम योगी को फॉलो किया, जिसे शिवपाल द्वारा भाजपा में जाने का साफ संकेत माना जा रहा है।

दरअसल, जानकारों की मानें तो चुनावों के बाद अखिलेश अपने सहयोगियों को साथ जोड़कर रखने में कामयाब नहीं हो पाते। यह पिछले तीन विधानसभा चुनाव में देखने को मिला है।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। उस समय अखिलेश यादव और राहुल गांधी  की जोड़ी को दो लड़कों की जोड़ी करार दिया गया। हालांकि, यह जोड़ी चुनाव खत्म होते ही टूट गई।

वहीं वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश और मायावती गठबंधन को बुआ-बबुआ की जोड़ी के रूप में पेश किया गया। यह भी चुनाव के बाद नहीं टिक पाई। ऐसे में यूपी चुनाव 2022 के बाद अब अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव को नजरअंदाज कर रहे हैं और भाजपा इसका फायदा उठाने की कोशिश में है।

बताया जा रहा है कि बीजेपी अब विधानसभा में शिवपाल यादव को उपाध्यक्ष का पद देने की तैयारी कर रही है। उपाध्यक्ष का पद विपक्ष के नेता को देने की परंपरा रही है। ऐसे में भाजपा एक तीर से दो शिकार करने की तैयारी में है।

वह विधानसभा में अखिलेश यादव के समकक्ष शिवपाल यादव को बैठा देगी। अभी तक शिवपाल एक सपा विधायक के तौर पर ही विधानसभा में बैठेंगे। यह उनके कद के अनुरूप नहीं होगा। विधानसभा उपाध्यक्ष का पद मिलने के बाद वे नेता प्रतिपक्ष के बगल वाली कुर्सी पर बैठने के हकदार हो जाएंगे। इससे शिवपाल को नजरअंदाज करने की उनकी सारी कवायद फेल हो जाएगी। वहीं भाजपा इस कदम से यादव वोट बैंक में एक संदेश देने की कोशिश करेगी कि उनके लिए कोई भी वर्ग पराया नहीं है। साथ ही, संदेश यह भी जाएगा कि अखिलेश ने अपने चाचा को किनारे लगा दिया तो भाजपा ने उन्हें एक सीट दे दी। ऐसे में पार्टी की छवि इस वोट बैंक में बदल सकती है।

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