यूपी चुनाव : इस खास सीट पर भाजपा ने बिगाड़ा सपा का समीकरण, पल भर में पलट गया पूरा खेल

लखनऊ। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पूरे देश में घमासान जारी है। ऐसे में यूपी भी किसी मामले में पीछे नहीं है। यहां भी सियासी दलों की उठा पटक जारी है। एक ओर जहां विपक्षी दल भाजपा शासित योगी सरकार को गिराने के लिए हर संभव कोशिश करने में लगे हुए हैं। वहीं भाजपा भी अपनी सत्ता को बचाने के लिए कोई कोर कसार नहीं छोड़ना चाहती है। यही वजह है कि बीते रविवार को भाजपा ने कई विपक्षी दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल किया, जिसमें समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक कालीचरण राजभर का नाम भी शामिल है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि सियासी जंग के दौरान भाजपा इन्हें सपा के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है।

बता दें कालीचरण राजभर 2002 और 2007 में जहुराबाद विधान सभा क्षेत्र से बसपा के विधायक निर्वाचित हुए। बाद में उन्होंने बीएसपी छोड़कर समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर लिया था।

खबरों के मुताबिक़ रविवार को लखनऊ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कालीचरण राजभर ने बीजेपी का दामन थामा। दरअसल ओमप्रकाश राजभर का समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक गठबंधन होने के बाद सपा से कालीचरण राजभर को टिकट नहीं मिल पाता, इसलिए वह बीजेपी में शामिल हो गए।

वहीं बीजेपी को बहुत पहले से ही जहुराबाद विधान सभा सीट पर एक मजबूत उम्मीदवार की तलाश थी। अब जाकर उसे कालीचरण राजभर जैसा कैंडिडेट मिल गया है।

बता दें 2012 के चुनाव में कालीचरण राजभर हैट्रिक लगाते-लगाते रह गए थे। इनकी हार की वजह ओपी राजभर बने थे। उस चुनाव में राजभर वोटों का विभाजन हो गया था। कालीचरण राजभर और ओपी राजभर के बीच वोटों के विभाजन के प्रतिफल समाजवादी पार्टी की शादाब फातिमा विजयी होने में कामयाब रहीं थी।

पिछले चुनाव में ओम प्रकाश राजभर का गठबंधन बीजेपी के साथ था इसलिए वो जीतने में कामयाब हो गए लेकिन इसबार लड़ाई पूरी दिलचस्प होगी क्योंकि कालीचरण हारने के बाद भी दोनों चुनावों में दूसरे नंबर पर थे।

कालीचरण के अलावा महाराजा सुहेलदेव सेना के अध्यक्ष बब्बन राजभर, भारतीय संघर्ष समाज पार्टी के मदन राजभर, मोनू राजभर जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं। राज्य की राजनीति में इन नेताओं के नाम भले ही पहले न सुने हों और न पढ़े हों, लेकिन इन लोगों का अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छा राजनीतिक प्रभाव है।

मऊ में मदन राजभर, श्रावस्ती में मोनू राजभर, गाजीपुर में कालीचरण राजभर का उनकी जातियों पर अच्छा प्रभाव है। ये नेता चुनाव जीतेंगे या नहीं ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन ये नाम किसी का भी जातिगत समीकरण बिगाड़ने के लिए काफी है।

राजभर समाज के नेताओं को पार्टी में शामिल करने के पीछे की बड़ी वजह ओम प्रकाश राजभर का मुकाबला करना है, जो कभी बीजेपी के सहयोगी रहे थे। मगर, ओम प्रकाश राजभर इस बार अखिलेश यादव के साथ हैं। राजभर की राजनीतिक स्थिति यह है कि उनके पास 4 विधायक हैं। साथ ही पहले वह खुद कैबिनेट मंत्री थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ चीजें खराब हो गईं और उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ दिया।

हालांकि ओम प्रकाश राजभर का दावा है कि सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में इनकी जनसंख्या 4.44 प्रतिशत होगी। यूपी की 100 से अधिक सीटों पर इनकी जाति के लोगों का प्रभाव है। इस समुदाय का नेतृत्व करने वाले नेताओं का दावा है कि वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, देवरिया, बलिया और मऊ जिलों में राजभर की आबादी का 18-20 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि अयोध्या, अंबेडकर नगर, गोरखपुर, संत कबीरनगर की सीटें हैं। वहीं महाराजगंज, कुशीनगर इन, बस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर और श्रावस्ती, राजभर में 10 प्रतिशत वोट होने का दावा है।

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