किसी फिल्म से कम नहीं हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह रोचक कहानी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता सोशल मीडिया पर दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ती जा रही है। सीएम योगी को देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो न जानता हो। ये एक ऐसे सीएम हैं, जो अपने कार्यों से पूरे देश में जाने जाते हैं। यूपी में योगी अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के लिए यमराज हैं। इनके शासन काल में अपराध करने वाले अपराधी भी कांपते हैं।

बता दें कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में लम्बे समय से चर्चा में रहा अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अब हो रहा है। अभी हाल ही में पीएम मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्धाटन किया था। इस बीच कहा जा रहा है कि अयोध्या, काशी के बाद अब मथुरा की बारी है।

मोदी सरकार ने लम्बे समय से चली आ रही सबसे विवादित मामले को हल कर दिखाया है। जिसमें राम मंदिर, धारा 370 और तीन तलाक आदि जैसे कई मामले शामिल हैं। 

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक रोचक कहानी के बारे में जानेंगे। इस कहानी के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि सीएम योगी 12 साल पहले कैसे नायक बन गए थे।

सीएम योगी का आजमगढ़

जानकारी के अनुसार सीएम योगी का 1999 से ही आजमगढ़ आना जाना था, इस दौरान एक पुजारी की हत्या हो गई थी, जिसे लेकर योगी ने बड़ा प्रदर्शन किया था। इसके बाद 2005 में मऊ दंगे के बाद हिंदू युवा वाहिनी ने आजमगढ़, मऊ और अन्य आसपास के जिलों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी थी।

योगी का काफिला

रैली की सुबह, गोरखनाथ मंदिर से योगी का काफिला निकला, जो आजमगढ़ पहुंचते-पहुंचते 200 से अधिक वाहनों में तब्दील हो गया। तभी एक पत्थर उनकी गाड़ी पर आकर लगा। योगी के काफिले पर हमला हो चुका था। हमला सुनियोजित था। उस वक्‍त योगी ने ये संकेत दे दिया कि हमला मुख्‍तार अंसारी ने करवाया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि काफिले पर लगातार एक पक्ष से गोलियां चल रही थीं, गाड़ियों को तोड़ा जा रहा था पुलिस मौन बनी रही।

2008 में आजमगढ़ में हुआ योगी के काफिले पर हमला

मऊ दंगों के तीन साल बाद यानी वर्ष 2008 में योगी आदित्‍यनाथ ने मुख्‍तार अंसारी को फिर ललकारा। तारीख के अनुसार 7 सितंबर 2008 को आजमगढ़ में डीएवी कॉलेज का मैदान में रैली निकली। योगी आदित्यनाथ उसमें मुख्य वक्ता थे। गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला। उन्हें आजमगढ़ में विरोध की पहले से ही आशंका थी, इसलिए टीम योगी पहले से ही तैयार थी।

आजमगढ़ के करीब पहुंचने तक काफिले में करीब 100 चार पहिया और सैकड़ों की संख्या में बाइक जुड़ चुकी थीं। एक पत्थर काफिले में मौजूद सातवीं गाड़ी यानि योगी के गाड़ी पर लगा। योगी के काफिले पर हमला हो चुका था। हमला सुनियोजित था। काफिला तीन हिस्सों में बंट चुका था। हमलावर योगी की तलाश में थे, तभी पता चला कि योगी आगे गई छह कारों के साथ निकल चुके थे, वास्तव में वो काफिले के पहली एसयूवी में थे।

योगी ने आतंकी हमलों और बशीर की गिरफ्तारी को राजनीतिक रंग देने पर तीखा हमला बोला, लेकिन अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले पर एक शब्द भी नहीं कहा।

मुख्यमंत्री योगी की कहानी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को पंचूर गांव, पौढी गडवाल, उत्तराखंड में एक राजपूत परिवार में हुआ था। सीएम योगी ने 1989 में 12वीं पास की और 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा गडवाल विश्वविद्यालय से गणित में बी।एसी की। इसी कॉलेज से उन्होंने एमएससी भी की।

1992 में योगी गोरखपुर आए। महंत अवैधनाथ से दीक्षा ली। 1994 में संन्यासी बन गए। महंत अवैधनाथ के निधन के बाद बाद योगी को गोरखनाथ मंदिर का महंत बना दिया गया।

लगातार 5 बार सांसद

सीएम योगी 1998 में पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट से चुनाव लड़े और जीत गए थे। 12वीं लोकसभा चुनाव में वो सबसे कम उम्र (26 वर्ष) के सांसद थे। 1998 से लेकर मार्च 2017 तक योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद रहे। 2017 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा सीट से लगातार 5 बार सांसद चुने गए हैं।

बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं, हिंदू युवा वाहिनी संगठन हिन्दू युवाओं का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह है।

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