…तो यूपी में भाजपा की जीत पक्की! जानिए एक्जिट पोल पर क्या कहती है ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट?

लखनऊ मंगलवार को यूपी के अंतिम चरण के लिए मतदान समाप्त होने के बाद से ही इस बात को लेकर लगातार कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं कि साल 2022 में यूपी की गद्दी किस दल के पाले में गिरने की उम्मीद है। क्या दोबारा से सीएम की कुर्सी पर सीएम योगी का कब्जा होगा? या फिर बाजी पलटेगी और यूपी की बागडोर सपाई कुंवर अखिलेश के हाथों में जाएगी!

ऐसे में देश के कई मशहूर समाचार चैनलों के द्वारा मतदान समाप्त होने के बाद एक्जिट पोल के माध्यम से आंकड़ों का लेखा-जोखा पेश किया जाने लगा और इस बात का दम भरा जाने लगा कि भाजपा एक बार फिर अपने कहे अनुसार प्रचंड बहुमत से प्रदेश में सरकार बनाने वाली है।

इंडिया टुडे के एक्जिट पोल के अनुसार भाजपा के खाते में 228 से 326 के बीच सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं ‘सी वोटर’ के सर्वे के मुताबिक़ भाजपा के खाते में 228 से 244 सीटें आ रही हैं। वहीं टुडेज चाणक्य की बात करें तो इसके हिसाब से भाजपा के खाते में अनुमानित सीटें 294 बताई जा रही हैं।

मगर, यह महज एक अनुमानित आंकड़े हैं, असल में हकीकत किस ओर करवट लेकर बैठेगी यह तो 10 मार्च की शाम तक वोटों की गिनती के बात ही साफ हो पाएगा।

ऐसे में ग्राउंड जीरो की बात करें तो लोगों से बातचीत कर जब इस विषय में जानने का प्रयास किया गया तो जो हकीकत सामने आई वो भी इन बड़े-बड़े समाचार चैनलों के नतीजों से प्रथक नहीं दिखी।

किसी ने कहा कि भाजपा की जीत पक्की है। मोदी-योगी की जोड़ी को तोड़ना नामुमकिन है। किसी ने कहा कि एक्जिट पोल कुछ भी दिखाएं मगर, भाजपा इस बार प्रदेश में 300 के पार सीटें हासिल कर अपना कीर्तिमान बनाएगी।

वहीं कुछ लोगों की यह राय भी सामने आई कि इस बार समाजवादी पार्टी ने भाजपा को कांटे की टक्कर दी है। ऐसे में मुमकिन है भाजपा की काफी सीटें कटें, लेकिन फिर भी जीत भाजपा की ही होगी।

ऐसी पशोपेश की स्थिति में फिलहाल अभी कुछ भी खुलकर कह पाना उचित नहीं। फिर भी जब यूपी में कई जिलों के दौरे कर इस मामले में जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश की गई तो ये बात निकल कर सामने आई कि मुफ्त राशन एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है।

जनता की तरफ से ही ये बात कही जा रही है कि जिनका खाया है, उनको ही वोट करेंगे। मोदी का नमक खाया है ये बात भी कई लोगों से मुंह से सुनने को मिली।

वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि चुनाव में योगी की जबरदस्त लहर है। योगी अब यूपी में मोदी के बाद सबसे लोकप्रिय नेता बन चुके हैं।

वहीं गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित पूरी तरह से बीजेपी के लिए गोलबंद हो चुके हैं। बहुत निचले तबके से आने वाले हरिजन समाज के लोगों का वोट भी बीजेपी के वोट प्रतिशत को बढ़ाने जा रहा है।

इतना ही नहीं मायावती के कोर वोटर को ये कहते हुए देखा जा रहा है कि पहली बार उनको किसी सरकार ने कुछ दिया है, क्योंकि इससे पहले की सरकारों में कोटेदार मनमानी करते थे। मगर, पहली बार मुफ्त राशन बहुत अच्छी क्वालिटी का मिला है।

ऐसे में आलम ये हैं कि जब बीजेपी के कार्यकर्ता ये कहते हैं कि वोट कमल के फूल को देना है, तो लोग अपने हाथ से कौर बनाते हैं और उसे मुंह तक ले जाकर कहते हैं कि वोट फूल को ही देंगे।

वहीं जिन इलाकों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है वहां के यादव और जाटव हिंदू भी बीजेपी को वोट कर रहे हैं। मुस्लिम वोट एकजुट होकर पड़ रहा है, ये कहना भी पूरी तरह से ठीक नहीं है। वजह यह है कि ओवैसी की पार्टी को भी वोट मिल रहा है।

ग्राउंड रिपोर्ट पर काम करने वाला एक पत्रकार बताता है कि ओवैसी का करिश्मा कम नहीं हुआ है, जिस बूथ पर उसने मतदान किया है, वहां पर 400 के करीब मुस्लिम वोट हैं। वहां पर भी करीब 25 वोट ओवैसी को मिले हैं। ऐसे में हमारी विधानसभा सीट पर 5000 वोट ओवैसी को मिलने जा रहा है।

इसके अलावा यह बात भी निकल कर सामने आ रही है कि पूर्वांचल और अवध के यादवों का भी अब अखिलेश यादव से मोहभंग हो रहा है। बहुत कम संख्या में ही सही लेकिन यादव वोट भी कुछ मात्रा में बीजेपी को मिलने जा रहा है।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार 2014, 2017 और 2019 के मुकाबले बीजेपी का वोट हर सीट पर बढ़ ही रहा है।

हालांकि, यह काफी दुखद है कि कई इलाकों में मुफ्त राशन हिंदुत्व से भी बड़ा मुद्दा है। आज भी लोग मुफ्त वाली पार्टी को ही ज्यादा तरजीह देते हैं। हालांकी इसमें कोई दो राय नहीं कि कानून व्यवस्था भी लगभग सभी इलाकों में बहुत बड़ा मुद्दा है।

यूपी का कट्टरहिंदूवादी वर्ग अब योगी को अपने उद्धारक के रूप में देख रहा है। वो अब ये उम्मीद कर रहा है कि योगी ही यूपी को इस्लामिक कब्जे से मुक्ति दिलवा सकते हैं इस तरह बीजेपी और योगी को बहुत गंभीरता पूर्वक विचार करना होगा।

वोट प्रतिशत कम होना कोई चिंता की बात नहीं है, क्योंकि बड़े पैमाने पर उन लोगों के वोट भी कटे हैं, जो पहले वोट देते रहे हैं। पूर्वांचल-अवध में बड़ी आबादी रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर चुकी है इस वजह से भी इन इलाकों में वोट 55 प्रतिशत के आसपास ही रहता है।

ऐसे में अनुमान इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि इन स्थितियों को देखते हुए बयार उसी तरफ रही, जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है तो निश्चित ही ओम प्रकाश राजभर, धर्म सिंह सैनी और स्वामी प्रसाद मौर्य की हालत काफी खराब है और इनमें से कुछ का राजनीतिक करियर अब पूरी तरह से चौपट हो जाएगा।

वहीं जानकारी यह भी है कि बागपत-शामली-मेरठ के अलावा वेस्ट यूपी की बाकी सीटों पर जाट 80 प्रतिशत तक बीजेपी को वोट किया है ।

आपको जानकर हैरानी होगी कि बढौत में मुसलमानों के उस वर्ग ने बीजेपी को वोट कर दिया है जो पहले राजपूत थे और बाद में कन्वर्ट होकर मुसलमान हो गए। ऐसी पुख्ता खबरें मुझे जमीन से मिली हैं।

वहीं बीएसपी के कोर जातिगत जाटव वोटर ने भी बीजेपी के लिए लाभार्थी होने की वजह से मतदान किया है। अगर जाटवों ने बीजेपी को पहले से ज्यादा वोट दिया है तो ये मानकर चलिए कि बीजेपी गठबंधन 340 से 350 तक सीटें हासिल कर सकती हैं। यानी हर तरफ से यही बात निकल कर सामने आ रही है कि इस भार भी भाजपा की जीत पक्की है! हालांकि निश्चित तौर पर कुछ भी कहना अतिश्योक्ति होगी। वजह यह है कि अभी वोटों की गिनती शेष है। और कई बार ऐसा भी देखा गया है कि साइलेंट वोटर के तौर पर बहुत से लोग ईवीएम में जिस दल के पक्ष में अपना वोट दर्ज कर आते हैं, उसे पूरी तरह से गुप्त रखने के लिए सभी के समक्ष किसी अन्य दल का नाम ले लेते हैं। ऐसे में यूपी की सत्ता किसके हाथ जाएगी और किसकी दावेदारी को झटका लगेगा ये तो दो दिन बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

17 − 5 =

Back to top button