‘भीड़ मामले’ में अखिलेश के सिर लटकी आयोग की तलवार, शाम तक देना होगा जवाब नहीं तो…

लखनऊ। बीती 14 जनवरी को भाजपा से अलग हुए स्वामी प्रसाद मौर्य का सपा में शामिल होने का जश्न मनाया जा रहा था। पर उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा न था कि इस खुशी का खामियाजा अखिलेश यादव को कितना महंगा पड़ेगा। दरअसल, आचार संहिता लगने के बाद किसी भी तरह की राजनैतिक रैलियों पर रोक लगा दी गई थी। फिर भी इसके बावजूद स्वामी के सपा में शामिल होने के अवसर को सपा ने न केवल उत्सव की तरह लिया, बल्कि भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा कर चुनाव आयोग के नियमों को भी ताख पर रख दिया। बता दें, इस मामले में चुनाव आयोग ने अखिलेश को नोटिस भेज कर ऐसा करने की वजह के पीछे का कारण बताने का आदेश दिया है, जिसका जवाब अखिलेश को आज शाम तक देना है।

खबरों के मुताबिक़ रविवार की शाम पांच बजे तक समाजवादी पार्टी को निर्वाचन आयोग को जवाब भेजना होगा कि आखिर उन्होंने 14 जनवरी को हजारों लोगों की सभा विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित अपने मुख्यालय पर कैसे की?

बता दें इसका जवाब नहीं मिलने की स्थिति में आयोग उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में आईपीसी की धारा 188, 269, 270, 341, 54 और तीन के तहत समुचित कार्रवाई करेगा।

दरअसल, निर्वाचन आयोग ने 14 जनवरी को लखनऊ में हुए हजारों लोगों के जमावड़े पर समाजवादी पार्टी को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। समाजवादी पार्टी को रविवार शाम तक लिखित जवाब दाखिल करने की मोहलत दी गई है।

जवाब नहीं आने पर आयोग एकतरफा कार्रवाई करेगा। दरअसल लखनऊ में सपा कार्यालय में स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी में शामिल होने के मौके पर पार्टी के लगभग दो हजार समर्थक वहां जमा हुए थे। पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने उनको संबोधित किया था। घंटों लोग बिना मास्क और शारीरिक दूरी के वहां जमे हुए थे।

इसके अलावा चुनाव आयोग ने शुरुआती दौर पर इसमें इलाके के SHO को दोषी पाते हुए निलंबित करने का आदेश शुक्रवार की रात को ही दे दिया था। साथ ही नेताओं के खिलाफ महामारी एक्ट के तहत एफआईआर भी दर्ज करने के आदेश दिए थे। अब पार्टी नेताओं से भी इस पर जवाब मांगा गया है।

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