सोनिया ने संसद में उठाया मनरेगा के तहत मजदूरों को भुगतान में देरी का मुद्दा, कही ये बात

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को संसद में मनरेगा के तहत मजदूरों को होने वाले भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान हो और ऐसा न होने पर मुआवजा दिया जाए।

लोकसभा में शून्यकाल में सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा के लिए आवंटित बजट में लगातार कटौती की जा रही है, जिसके कारण काम मिलने और समय पर मजदूरी के भुगतान की कानूनी गारंटी कमजोर पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार मनरेगा के लिए उचित बजट का आवंटन करे। काम के 15 दिनों के भीतर कामगारों को मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित हो। मजदूरी भुगतान में देरी की स्थिति में कानूनी तौर पर मुआवजे का भुगतान भी सुनिश्चित हो और इसके साथ ही राज्यों की वार्षिक कार्य योजनाओं को बिना किसी देरी के तुरंत निर्धारित किया जाए।

इस साल मनरेगा का बजट 2020 की तुलना में 35 प्रतिशत कम है, जबकि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। बजट में कटौती से कामगारों के भुगतान में देरी होती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ‘फोर्स्ड लेबर’ माना है। इसी वर्ष 26 मार्च को, दूसरे सभी राज्यों ने इस योजना के तहत अपने खाते में नकारात्मक संतुलन दिखाया है, जिसमें कामगारों को भुगतान का लगभग 5,000 करोड़ रुपये बकाया है।

उन्होंने आगे कहा कि हाल में सभी राज्यों से कहा गया है कि उनके सालाना श्रम बजट को तब तक मंजूरी नहीं दी जाएगी, जब तक कि वे लोकपालों की नियुक्ति और सोशल ऑडिट से संबंधित शर्तों को पूरा नहीं करेंगे। सोशल ऑडिट को निश्चित रूप से प्रभावी बनाया जाना चाहिए, लेकिन इसे लागू करने में कमियों को आधार बनाकर, इस योजना के लिए पैसे का आवंटन रोककर कामगारों को दंडित नहीं किया जा सकता है। यह अनुचित है और अमानवीय है। सरकार को इसमें बाधा डालने के बजाए इसका समाधान निकालना चाहिए।

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