कभी निभाई थी राममंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका, बोलीं- ‘बिना हिंदुत्व के हिंदू किस काम का’

90 के दशक में राममंदिर आंदोलन की कमान जिन चंद लोगों के हाथों में थी, उनमें कथा व्यास पूज्यनीय दीदी मां साध्वी ऋतंभरा का नाम प्रमुख था। अब उनका राम मंदिर निर्माण का सपना बीजेपी की सरकार में पूरा हो रहा है।

बता दें कि साध्वी ऋतंभरा ने राममंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई थी। 90 के दशक में मंदिर आंदोलन के दौरान उनका रोमांचकारी भाषण रामभक्तों को बहुत उत्साहित करता था, जिससे आंदोलन को काफी बल मिला था।

वहीं वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को लेकर साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि आज का दिन हिंदू समाज के लिए बड़ा दिन है। योगी और मोदी ने धन्य कर दिया। बाबा विश्वनाथ का इतना विहंगम दृश्य इससे पहले किसी ने सोचा भी नहीं था।

उन्होंने कहा कि संतजनों व सृजन शक्तियों का आशीर्वाद जिसे मिले वह हमेशा श्रेष्ठ रहता है। वहीं पीएम मोदी के कार्यक्रम के बाहर निकल रहे साधु-संतों के चेहरे पर अलौकिक खुशी बहुत कुछ कह रही थी। हर कोई बोल रहा था, जब तक मोदी-योगी हैं, सनातन धर्म, आस्था के सभी केंद्र सुरक्षित व भव्यता की ओर अग्रसर रहेगे। इसलिए मोदी व योगी को हमारी उम्र लग जाए।

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इससे पहले हिंदू एकता महाकुंभ में आईं साध्वी ऋतंभरा ने बिना किसी का नाम लिए राहुल गांधी के हिंदू और हिंदुत्व वाले बयान पर कटाक्ष किया था।

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उन्होंने कहा था कि बिना हिंदुत्व के हिंदू किस काम का है। हिंदू के मन में हिंदुत्व की भावना स्वत: होती है। यदि हिंदुत्व की भावना नहीं तो उसके हिंदू होने पर संदेह है।

एक सवाल के जवाब में साध्वी ने कहा था कि मंदिर आंदोलनकारियों को पुलिस तलाश रही थी। रेलवे स्टेशन से लेकर खेतों और भिखारियों के बीच जानें कितनी रातें काटीं थी। वेश बदलकर छिपते-छिपाते सभा करती थी। अब जिस राम मंदिर निर्माण का सपना देखा था, वह पूरा हो गया है।

साध्वी ऋतंभरा का कहना है कि मेरी तरुणाई श्रीराम जन्मभूमि को अर्पित हुई, इसका अगाध सुख है। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण पर उन्होंने सरयू का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था। उसकी पूर्ति में तमाम संकट झेले।

साध्वी कहती हैं कि ये लोगों का जोश था कि आंदोलन किसी संस्थान या संगठन का नहीं रहा, जनांदोलन बन गया। उसी का सुपरिणाम 5 अगस्त 2020 को मिला। वह कहती हैं कि राम मंदिर निर्माण को मैं अपने जीवन की पूर्णता और संपूर्णता के रूप में देखती हूं। मेरे शरीर की तरुणाई रामजन्मभूमि के लिए अर्पित हुई, इसका अगाध सुख है।

उनका कहना है कि आंदोलन में आडवाणी और जोशी ने राजनीतिक अलख जगाने का काम किया था। वहीं नेपथ्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि रामजी का काम करने वाले नेपथ्य में नहीं जा सकते। इन लोगों ने अलख जगाई। आंदोलन को धार दिया। ये लोग नींव में रहे हैं और बुनियाद हमेशा मजबूत ही रहती है। इन लोगों के त्याग, तपस्या को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

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