यूक्रेन हमले के बीच रूस को लगा बड़ा झटका, UNHRC से किया गया निलंबित

यूक्रेन पर रूस के हमले के 43वें दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने के लिए रूस को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से निलंबित कर दिया गया है। इस बीच यूक्रेनी शहर मैरियूपोल में पांच हजार से अधिक नागरिकों को मार डालने का आरोप रूसी सैनिकों पर लगा है।

यूएनएचआरसी से रूस को निलंबित करने के लिए अमेरिका द्वारा लाये गये एक प्रस्ताव को पारित करने के लिए 193 सदस्यीय महासभा (यूएनजीए) में इसके (प्रस्ताव के) पक्ष में 93 मत पड़े, जबकि भारत सहित 58 देश अनुपस्थित रहे। वोटिंग के बाद UNHRC से रूस को सस्पेंड कर दिया गया।

यूक्रेन के बुचा में हुए नरसंहार को देखते हुए रूस को मानवाधिकार परिषद से निलंबित करने का प्रस्ताव अमेरिका ने रखा था। अब रूस दूसरा देश बन गया है जिसकी यूएनएचआरसी सदस्यता छीन ली गई है, UNGA ने 2011 में लीबिया को परिषद से निलंबित कर दिया था।

वोटिंग से भारत ने इसलिए किया परहेज

रूस-यूक्रेन युद्ध मामले में भारत अपने तटस्‍थ रुख पर कायम है। अपने फैसले के कारण पर प्रकाश डालते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने मतदान के बाद कहा, “भारत ने आज महासभा में रूसी महासंघ को मानवाधिकार परिषद से निलंबित करने से संबधित प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया। हमने तर्कसंगत और प्रक्रिया सम्मत कारणों से यह किया।”

टी एस तिरुमूर्ति ने कहा, “यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक भारत शांति, संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है। हमारा मानना है कि रक्त बहाने और निर्दोष लोगों के प्राण लेने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता। यदि भारत ने कोई पक्ष लिया है तो वह है शांति और हिंसा को तत्काल समाप्त करने का।”

बता दें कि, पिछले माह भी संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के हमले की कड़ी निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित किया। भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया था। पीएम नरेंद्र मोदी पहले ही चुके हैं कि भारत की जरूरतें रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ जुड़ी हुई हैं लेकिन देश शांति के पक्ष में है और उम्‍मीद करता हैं कि बातचीत के जरिये सभी समस्‍याओं का समाधान तलाशा जाएगा।

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