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रक्षाबंधन : सिर्फ एक धागा नहीं, भाई-बहन के स्नेह को रक्षा सूत्र में बांधती है राखी

हाईलाइटस

  • क्या न करें राखी के दिन
  • हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन मनाने के पीछे कुछ कथाएं हैं, आईए जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी कथाओं के बारे में…
  • लक्ष्मी-राजा बलि की कथा
  • भविष्य पुराण की कथा
  • द्रौपदी- श्रीकृष्ण की कथा

इस साल रक्षाबंधन 22 अगस्त को मनाया जा रहा है। रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उनके सुखद और लम्बी उम्र की कामना करती है। भाई भी हर परिस्तिथि में बहन की रक्षा करने का वचन देते है।

हिंदी पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 22 अगस्त, दिन रविवार को पड़ रहा है।

  • इस बार राखी का पर कोई भद्रा नहीं पड़ रहा। इस लिए पुरे दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती है।
  • रक्षा बंधन के दिन भद्रा और राहुकाल में राखी न तो बांधनी चाहिए और नहीं भाई को बंधवानी चाहिए। भद्रा और राहुकाल में राखी बांधना भाई और बहन दोनों के लिए बहुत अशुभ होता है।
  • रक्षा बंधन पर भाई और बहन दोनों को काले रंग के इस्तेमाल से बचना चाहिए. यह नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
  • राखी बांधते समय बहन और भाई इस बात का ध्यान रखें कि भाई का मुख दक्षिण दिशा में न हो। राखी बंधवाते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखना उत्तम होता है।
  • रक्षा बंधन के अवसर पर भाई-बहन एक दूसरे को तौलिया या रुमाल उपहार में न दें। यह शुभदायक नहीं होता।
  • रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय तिलक में अक्षत के लिए खड़ा चावल का ही उपयोग करें। टूटे चावल का तिलक न लगाएं। क्योंकि अक्षत का मतलब जिसकी क्षति न हुई हो।

हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन मनाने के पीछे कुछ कथाएं हैं. आईए जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी कथाओं के बारे में…

लक्ष्मी-राजा बलि की कथा
कथा भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर असुरों के राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा। दानवीर बलि इसके लिए सहज राजी हो गया। वामन ने पहले ही पग में धरती नाप ली तो बलि समझ गया कि ये वामन स्वयं भगवान विष्णु ही हैं। बलि ने विनय से भगवान विष्णु को प्रणाम किया और अगला पग रखने के लिए अपने शीश को प्रस्तुत किया. विष्णु भगवान बलि पर प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। असुर राज बलि ने वरदान में उनसे अपने द्वार पर ही खड़े रहने का वर मांग लिया. इस प्रकार भगवान विष्णु अपने ही वरदान में फंस गए।तब माता लक्ष्मी ने नारद मुनि की सलाह पर असुर राज बलि को राखी बांधी और उपहार के रूप में भगवान विष्णु को मांग लिया।

भविष्य पुराण की कथा
भविष्य पुराण के अनुसार सालों से असुरों के राजा बलि के साथ इंद्र देव का युद्ध चल रहा था।इसका समाधान मांगने इंद्र की पत्नी सची विष्णु जी के पास गई, तब विष्णु जी ने उन्हें एक धागा अपने पति इंद्र की कलाई पर बांधने के लिए दिया। सची के ऐसा करते ही इंद्र देव सालों से चल रहे युद्ध को जीत गए। इसलिए ही पुराने समय में भी युद्ध में जाने से पहले राजा-सैनिकों की पत्नियां और बहने उन्हें रक्षा सूत्र बांधा करती थी, जिससे वो सकुशल जीत कर लौट आएं।

द्रौपदी- श्रीकृष्ण की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत में शिशुपाल के साथ युद्ध के दौरान श्री कृष्ण जी की तर्जनी उंगली कट गई थी। यह देखते ही द्रोपदी कृष्ण जी के पास दौड़कर पहुंची और अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी. इस दिन श्रावण पूर्णिमा थी। इसके बदले में कृष्ण जी ने चीर हरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी।

WRITER – PRIYANSHU SRIVASTAVA

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