PNB घोटाला : जांच एजेंसियों को मिली बड़ी कमियाबी, नीरव मोदी के करीबी को लाया गया भारत

नई दिल्ली। साल 2018 में हुए पीएनबी बैंक घोटाले मामले में जांच एजेंसियों के हाथ बड़ी सफलता लगी हैं। बता दें, इस घोटाले का खुलासा होने के बाद से ही इस मामले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी देश वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, अभी भी ये दोनों आरोपी देश से बाहर हैं, लेकिन नीरव मोदी का खास माना जाने वाला शख्स सुभाष शंकर जरूर जांच एजेंसियों के हाथ लग गया, जिसे स्पेशल विमान के जरिए इजिप्ट से भारत वापस लाया गया है।

खबरों के मुताबिक़ सुभाष शंकर करोड़ों रुपये के पीएमबी घोटाले में आरोपी था। उसे स्पेशल विमान के जरिए थोड़ी देर पहले इजिप्ट के काइरो से मुंबई लाया गया है।

49 साल का सुभाष शंकर 2018 में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के समय भारत से भाग गया था। सुभाष नीरव मोदी का सबसे खास है। काइरो से इसे मुंबई लाया गया और अब सीबीआई ने इसे गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि मुम्बई में कोर्ट में पेश करके इसकी कस्टडी लेकर पीएनबी घोटाले में इससे पूछताछ की जाएगी। आपको बता दें कि सुभाष नीरव मोदी की कंपनी में डीजीएम फाइनेंस के पद पर कार्यरत था।

बता दें, कारोबारी नीरव मोदी और उसके साथियों ने साल 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने के लिए लाइन ऑफ क्रेडिट सुविधा पाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच से संपर्क किया। आम तौर पर बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए लाइन ऑफ क्रेडिट जारी करता है। इसमें बैंक सप्लायर को भुगतान करता है। कर्ज लेने के 90 दिन के बाद नीरव मोदी को पैसा चुकाना था।

हालांकि पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों ने नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी लैटर ऑफ क्रेडिट जारी किए और इस बारे में मैनेजमेंट को अंधेरे में रखा गया। साजिश के तहत बैंक के कर्मचारियों ने इंटर बैंक मैसेजिंग सिस्टम तक अपनी पहुंच का फायदा उठाया जिससे भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को नीरव मोदी पर कोई शक नहीं हुआ और उन्होंने नीरव मोदी की कंपनियों को फॉरेक्स क्रेडिट जारी कर दिए।

जब लाइन ऑफ क्रेडिट मैच्योर हुए तो फर्जीवाड़े में शामिल बैंक के कर्मचारियों ने 7 साल तक दूसरे बैंक की रकम का इस्तेमाल इस लोन को रिसाइकिल करने के लिए किया। वहीं पुराने कर्मचारियों के रिटायर होने पर उनकी जगह आए नए कर्मचारियों ने ये गलती पकड़ी और घोटाले पर जांच शुरू कर दी गई।

ऐसे में जांच से बचने के लिए नीरव मोदी और मेहुल चोकसी दोनों ही देश छोड़ कर भाग गए थे। मगर, सरकार के प्रयासों के बाद साल 2019 में नीरव मोदी को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद भारतीय एजेंसियों की ओर से दायर याचिका पर लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया था। नीरव मोदी ने इस आदेश को चुनौती दी है। नीरव मोदी ने मानसिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों का हवाला दिया है।

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