‘द कश्मीर फाइल्स’ से प्रभावित हुए पीएम मोदी, कहा- फिल्म में सच्चाई… ‘कांग्रेस में संवेदनहीनता’

नई दिल्ली। मंगलवार को दिल्ली के अम्बेडकर भवन में भाजपा की संसदीय दल की बैठक हुई। इस बैठक में पीएम मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। इस बैठक को संबोधित करते हुए जहां पीएम मोदी ने एक ओर परिवारवादियों को लोकतंत्र का खतरा बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। वहीं इस दौरान उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि इस फिल्म में कश्मीर की उस सच्चाई को उजागर किया गया है, जिसे अभी तक दुनिया से छुपाया गया था।

उन्होंने कहा कि फिल्म में जो दिखाया गया, उस सत्य को दबाने की कोशिश की गई थी। इन दिनों सिनेमाघरों में चल रही फिल्म कश्मीर फाइल्स की काफी चर्चा है।

बता दें, 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए नरसंहार और पलायन की त्रासदी को इसमें दिखाया गया है। अब इस फिल्म की चर्चा प्रधानमंत्री ने की है। उन्होंने कहा कि कश्मीर के सत्य को दबाने की कोशिशें हुई थीं।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि पीएम मोदी ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक में कश्मीर फाइल्स फिल्म का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि कैसे इस फिल्म के जरिए सच को बाहर लाया गया है। पीएम ने कहा कि कैसे सत्य को दबाने के लिए एक इकोसिस्टम काम करता है। कुछ दिन पहले ही फिल्म के कलाकार और निर्माता ने पीएम से मुलाकात की थी। वहीं इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन दिनों #TheKashmirFiles लगातार ट्रेंड में बना हुआ है।

वहीं दूसरी ओर इस फिल्म पर राजनीति भी शुरू हो गई है। केरल कांग्रेस के ट्वीट्स पर काफी बवाल हुआ। एक दिन पहले लोकसभा में भी कश्मीर फाइल्स का जिक्र हुआ था।

इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन को दर्शाने वाली फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि इस विषय पर विपक्षी पार्टी के ट्विटर हैंडल से कही गई बातें सच्चाई से इनकार के उसके रुख को सामने रखती हैं।

वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस में संवेदनशीलता की कमी है और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए वह केवल एक समुदाय के साथ सहानुभूति रखती है।

केरल कांग्रेस ने कई ट्वीट कर 1990 के दशक में भाजपा के समर्थन वाली वीपी सिंह सरकार और तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन को घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

इसके अतिरिक्त एक ट्वीट में राज्य इकाई ने जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों और हिंदुओं की मौत की तुलना भी की, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया। आलम ये है कि इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर लोग दो खेमों में बंट गए। एक तरफ कश्मीरी पंडितों का दर्द देख लोग सहानुभूति जता रहे हैं तो दूसरी तरफ कुछ लोग दूसरी घटनाओं पर फिल्म न बनने की बातें कह रहे हैं।

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