भारत अब लम्बी दूरी तक हवा में मार सकेगा दुश्मन के विमान, MRSAM का टेस्ट कामयाब

भारतीय सेना के लिए बनाई गई मध्यम रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का 27 मार्च 2022 को ओडिशा के बालासोर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सफल परीक्षण किया। मिसाइल ने पूरी सटीकता के साथ टारगेट को कुछ मिनट में ही ध्वस्त कर दिया।

मिसाइल का यह परीक्षण ओडिशा के तट से दूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप में स्थित रक्षा सुविधा से किया गया। मिसाइल के इस वर्जन में बेस वेरिएंट की तुलना में काफी लंबी दूरी तक मारक क्षमता के अलावा अधिक सक्षम इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स (ईसीसीएम) विशेषताएं हैं।

डीआरडीओ प्रवक्ता के अनुसार मिसाइल के नए वर्जन में बेस वेरिएंट की तुलना में काफी लंबी दूरी तक मारक क्षमता के अलावा अधिक सक्षम इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स (ईसीसीएम) विशेषताएं विकसित की गई हैं। सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) के उन्नत सेना संस्करण का परीक्षण रविवार को आईटीआर बालासोर से लगभग 10.30 बजे किया गया। मिसाइल ने लंबी दूरी पर उच्च गति वाले हवाई लक्ष्य को रोककर सीधे प्रहार में उसे नष्ट कर दिया। एमआरएसएएम के मीडियम रेंज वाली सेना संस्करण का पहला सफल परीक्षण 23 दिसम्बर, 2020 को ओडिशा तट के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया था। उस समय भी इस मिसाइल ने एक उच्च गति वाले मानव रहित लक्षित विमान का पीछा करते हुए सीधे तौर पर प्रहार करके हवाई लक्ष्य को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।

भारत और इजराइल की नई उपलब्धि है एमआरएसएएम

बराक-8 को एलआरएसएएम या एमआरएसएएम मिसाइल के रूप में भी जाना जाता है। यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे विमान, हेलीकॉप्टर, एंटी-शिप मिसाइल और यूएवी के साथ-साथ बैलिस्टिक जैसे किसी भी प्रकार के हवाई खतरे से बचाने के लिए बनाया गया है। इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने संयुक्त रूप से मीडियम रेंज वाले एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम का निर्माण किया है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध काफी मजबूत रहे हैं, ऐसे में भारत और इजराइल की यह नई उपलब्धि दोनों ही देशों को दुश्मन के हवाई हमले से सुरक्षा देगी। वैसे इसकी रेंज 100 किलोमीटर तक है लेकिन 50 से 70 किलोमीटर की रेंज में इस मिसाइल से दुश्मन के एयरक्राफ्ट, ड्रोन या मिसाइल को आसानी से मार गिराया जा सकता है। इन मिसाइलों का उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) करता है।

वायुसेना में हो चुकी है शामिल

मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली बराक-8 मिसाइल प्रणाली (एमआरएसएएम) काे भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 09 सितम्बर, 2021 को जैसलमेर में एक कार्यक्रम में एमआरएसएएम को वायुसेना के 2204 स्क्वाड्रन में शामिल किये जाने की औपचारिकता पूरी की थी। इस मिसाइल में 50-70 किमी. की दूरी पर दुश्मन के विमान को मार गिराने की क्षमता है। यह आकाश के बाद दूसरा मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जो वायुसेना में शामिल किया गया है। एमआरएसएएम से लैस करने के लिए जैसलमेर की स्क्वाड्रन 2204 का गठन किया गया है। इसी स्क्वाड्रन ने कारगिल वार के दौरान पश्चिमी सेक्टर में युद्ध परिचालन में अहम भूमिका निभाई थी।

क्यों खास है हवाई रक्षा प्रणाली

एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक सेना की हवाई रक्षा के लिए एमआरएसएएम हर मौसम में 360 डिग्री पर काम करने वाली हवाई रक्षा प्रणाली है, जो किसी भी संघर्ष क्षेत्र में विविध तरह के खतरों के खिलाफ संवेदनशील क्षेत्रों की हवाई सुरक्षा करेगी। एमआरएसएएम का वजन करीब 275 किलोग्राम, लंबाई 4.5 मीटर और व्यास 0.45 मीटर है। इस मिसाइल पर 60 किलोग्राम तक हथियार लोड किये जा सकते हैं। यह मिसाइल दो स्टेज की है, जो लॉन्च होने के बाद कम धुआं छोड़ती है। एमआरएसएएम एक बार लॉन्च होने के बाद 70 किलोमीटर के दायरे में आने वाली किसी भी मिसाइल, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और निगरानी विमानों को मार गिराने में पूरी तरह से सक्षम है। यह 2469.6 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दुश्मनों पर प्रहार और हमला कर सकती है।

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