मन की बात : देश को संबोधित कर मोदी ने किया बापू को याद, शहीदों के लिए कही ये बड़ी बात

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो के माध्यम से रविवार को साल 2022 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम की शुरुआत कर देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश की जनता को संबोधित करते हुए सबसे पहले महात्मा गांधी को को याद करते हुए कहा कि आज बापू की शिक्षा और संदेशों को याद करने का दिन है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि 23 जनवरी यानी नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती से अब गणतंत्र की शुरुआत होगी, जिसे गांधी जी की पुण्य तिथि यानी 30 जनवरी तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

खबरों के मुताबिक़ इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि हमने देखा कि इंडिया गेट के समीप अमर जवान ज्योति और पास में नेशनल वॉर मेमोरियल की ज्योति को एक किया गया। इस भावुक अवसर पर शहीद परिवारों की आंखों में आंसू थे। मुझे सेना के कुछ पूर्व जवानों ने लिखा कि शहीदों की स्मृति के सामने प्रज्ज्वलित ज्योति शहीदों की अमरता का प्रतीक है। जब भी अवसर मिले तो नेशनल वॉर मेमोरियल जरूर जाएं। अपने परिवार और बच्चों को ले जाएं। आपको अलग ऊर्जा और प्रेरणा का अनुभव होगा।

इस दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भी दिए गए। उन बच्चों को मिले हैं, जिन्होंने साहसिक कार्य किए हैं। इनके बारे में हमें बच्चों को जरूर बताना चाहिए। अभी पद्म सम्मान का भी जिक्र हुआ है। इनमें ऐसे नाम भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इन हीरोज ने साधारण परिस्थितियों में असाधारण काम किए हैं।

उत्तराखंड की बसंती देवी के पति का निधन कम उम्र में हो गया। वे आश्रम में रहने लगीं। उन्होंने नदी बचाने का काम किया और पर्यावरण के लिए असाधारण काम किया। मणिपुर की बिनोदेवी दशकों से लोकल आर्ट का संरक्षण कर रही हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश के अर्जुन सिंह ने बैगा आदिवासियों की नृत्य कला को बचाया।

पीएम ने कहा कि मुझे एक करोड़ से ज्यादा बच्चों ने अपने मन की बात लिखकर भेजी है। ये देश-विदेश से आए हैं। इनमें से काफी पोस्टकार्ड को पढ़ने की कोशिश की है। गुवाहाटी से रिद्धिमा ने लिखा कि वे आजादी के 100वें साल में ऐसा भारत देखना चाहती हैं, जो दुनिया का सबसे स्वच्छ देश हो, आतंकवाद से मुक्त हो, 100 फीसदी साक्षर हो। मैं कहता हूं कि हमारी बेटियां जो सपने देखती हैं, वे पूरे होते ही हैं। आपकी युवा पीढ़ी लक्ष्य बनाकर काम करेगी, तो भारत वैसा ही होगा जैसा चाहती हैं। उत्तर प्रदेश की नव्या लिखती हैं कि 2047 में ऐसा भारत देखना चाहती हैं, जहां सम्मान मिले सभी को, किसान खुशहाल हो और भ्रष्टाचार न हो। इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।

आगे उन्होंने मिली के चिट्ठी का जिक्र करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के रायसेन से 10वीं में पढ़ने वाली भावना ने अपने पोस्टकार्ड को तिरंगे को सजाया, क्रांतिकारी शिरीष कुमार के बारे में लिखा है। गोवा के लॉरेंसो ने आजादी के अनसंग हीरोज के बारे में लिखा है। उन्होंने लिखा कि भीखाजी भारतीय स्वतंत्रता संग्रा्म में शामिल सबसे बहादुर महिलाओं में से एक थीं। उन्होंने देश-विदेश में अभियान चलाए। भीखाजी स्वाधीनता आंदोलन की जांबाज महिलाओं में से एक थीं। 1907 में जर्मनी में उन्होंने तिरंगा फहराया था। इस तिरंगे के डिजाइन में उनका साथ श्यामजी कृष्ण वर्मा ने किया था। जेनेवा में श्यामजी का निधन हुआ। उनकी इच्छा थी कि उनकी अस्थियां भारत लाईं जाएं। आजादी के दूसरे ही दिन ये काम होना था, पर ये काम नहीं हो पाया। इस काम का सौभाग्य मुझे गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मिला।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button