होली का महत्त्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधी और इससे जुड़ी सभी आवश्यक बातें विस्तार से जानें  

लखनऊ। होली का नाम आते ही हवाओं में उड़ता गुलाल और मुंह में घुलती मावे से भरी गुझियों की मिठास जहन में एक अनोखी सी उमंग भर देती है। साल भर लोग इस त्यौहार का इंतजार करते हैं। ताकि वे इस पावन अवसर पर अपने भूले-बिसरे दोस्तों से मिलकर उनके साथ उन यादों को ताजा कर सकें, जिनके बारे में शायद इस भागदौड़ भरी जिन्दगी में ख्याल आने पर भी ध्यान नहीं जा पता।

जी हां… आज इंसान की जिन्दगी इतनी व्यस्त हो गई है कि उसे खुद के लिए ही वक्त नहीं मिल पाता। ऐसे में होली से बेहतर कोई दूसरा मौक़ा हो ही नहीं सकता, जब आप अपने उन दोस्तों और परिजनों से मिल सकते हैं, जिन्हें चाह कर भी आप वक्त न दे पाते। 

इसके आलावा यह जान लेना भी जरूरी है कि भारतीय संकृति में प्रत्येक पर्व का एक अलग महत्त्व है। साथ ही उस हर पर्व की एक खास कहानी और सीख भी शामिल होती है। ऐसे में होली का त्यौहार भी एक अनोखी सीख लेकर आता है, जिससे संबंधित एक पौराणिक कथा भी है, जो इंसान को सही और गलत के मायने समझाने का प्रयास करती है। साथ ही धर्म और अधर्म के बीच का फर्क समझाती है। 

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, हिरण्यकशिपु का ज्येष्ठ पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता के लाख कहने के बावजूद प्रह्लाद विष्णु की भक्ति करता रहा। दैत्य पुत्र होने के बावजूद नारद मुनि की शिक्षा के परिणामस्वरूप प्रह्लाद महान नारायण भक्त बना। असुराधिपति हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने की भी कई बार कोशिश की परन्तु भगवान नारायण स्वयं उसकी रक्षा करते रहे और उसका बाल भी बांका नहीं हुआ।

असुर राजा की बहन होलिका को भगवान शंकर से ऐसी चादर मिली थी जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे जला नहीं सकती थी। होलिका उस चादर को ओढ़कर प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई। दैवयोग से वह चादर उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आ गई, जिससे प्रह्लाद की जान बच गई और होलिका जल गई। इस प्रकार हिन्दुओं के कई अन्य पर्वों की भाँति होलिका-दहन भी बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।

वहीं यह भी माना जाता है कि होलिका की अग्नि की पूजा करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। इस साल होलिका दहन का त्योहार 17 मार्च 2022 को मनाया जाएगा।

इस साल होली का त्योहार काफी खास होने वाला है। होली पर इस साल कई शुभ योग बनने जा रहे हैं। इस साल होली  पर वृद्धि योग, अमृत योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और ध्रुव योग बनने जा रहा है।

इसके अलावा, बुध-गुरु आदित्य योग भी बन रहा है। बुध-गुरु आदित्य योग में होली की पूजा करने से घर में सुख और शांति का वास होता है।

ऐसे में आइए जानते हैं होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, मंत्र और पूजा विधि-

होलिका दहन 17 बृहस्पतिवार, मार्च 17, 2022 को किया जाएगा। इस साल होलिका  दहन का शुभ मुहूर्त रात में 9 बजकर 16 मिनट से लेकर 10 बजकर 16 मिनट तक ही रहेगा।

ऐसे में होलिका दहन की पूजा के लिए आपको सिर्फ 1 घंटे 10 मिनट का ही समय मिलेगा। इसके अगले दिन शुक्रवार, 18 मार्च 2022 को रंगवाली होली खेली जाएगी।

  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 17, 2022 को 01 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 18, 2022 को 12 बजकर 47 तक रहेगी
  • भद्रा पूंछ – रात में 09 बजकर 06 से लेकर 10 बजकर 16 तक
  • भद्रा मुख – 17 मार्च रात 10 बजकर 16 से लेकर 18 मार्च 12 बजकर 13 तक

बता दें, होलिका दहन को लेकर लोगों को कंफ्यूजन है कि होलिका दहन 17 मार्च को किया जाना चाहिए या फिर 18 मार्च को। हालांकि, ज्योतिषियों के अनुसार, होलिका दहन का आयोजन 17 मार्च को ही किया जाना चाहिए। भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिए काफी अच्छी मानी जाती है। प्रदोष काल के समय जब पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो, उसी दिन होलिका दहन किया जाना चाहिए। अगर भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के बाद जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना चाहिए। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक हो तो ऐसी स्थिति में भद्रा पूँछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि भद्रा मुख में होलिका दहन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

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