दिलों को तोड़ रही ‘कश्मीर फाइल्स’! ‘मैं जिम्मेदार नहीं… बल्कि वे जो उस वक्त दिल्ली में बैठे थे’

नई दिल्ली। देश में हुई पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे सामने आने के अगले ही दिन रिलीज होने वाली फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ का नाम आज देश के हर एक बच्चे-बच्चे की जुबां पर चढ़ गया है। हर कोई इस फिल्म को पसंद कर रहा है। लोग लगातार इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों में जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सन 1990 में हुए बहुचर्चित कश्मीरी पंडितों के पलायन की दास्तां को इस फिल्म में जिस अंदाज में प्रस्तुत किया गया है, वो लोगों को उस दौर में गुजरे कश्मीरी पंडितों के दर्द को महसूस करने को मजबूर कर रहा है। यही वजह है कि इस फिल को लेकर लोग दो गुटों में बंट गए हैं।

एक वे, जो चाहते हैं कि इस फिल्म को अधिक से अधिक लोग देखें, ताकि उस दौर में हुई जिस सच्चाई को सालों तक छिपाया गया, उससे लोग रूबरू हो सकें।

वहीं दूसरी ओर उन लोगों की फेहरिस्त हैं, जिनका कहना है कि यह फिल्म महज एक प्रोपोगेंडा है। इस फिल्म में महज आधा सच ही दिखाया गया है। इस फिल्म का चित्रण महज फिल्मकार का नजरिया मात्र हैं। इससे हिंदू और मुस्लिम के मध्य की दरार और भी बढ़ जाएगी।

इसी फेहरिस्त में शामिल हैं जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला। एक निजी समाचार चैनल को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि कश्मीर में 1990 में जो भी हुआ वह साजिश थी, और कश्मीरी पंडितों को साजिश के तहत भगाया गया था। उन्होंने Kashmir Files पर बात करते हुए उसे प्रोपेगेंडा फिल्म बताया।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वह वक्त (जब कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर छोड़ा) बहुत खराब वक्त था। उस वक्त कश्मीरी पंडितों पर जो मुसीबतें आईं उसके लिए मेरा दिल आजतक रो रहा है। कोई कश्मीरी ऐसा नहीं है जो उनके लिए रो नहीं रहा है। सब चाहते हैं कि उनकी घर (कश्मीर) वापसी हो। तब ही कश्मीर पूरा होगा। 

फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि 90 में जो कुछ हुआ वह साजिश थी, इस साजिश जो किसने किया? इसकी जांच के लिए कमीशन बैठाया जाए, तब पता चलेगा कि कौन-कौन इसमें शामिल था।

इंटरव्यू में राज्य के पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि इस मामले में फारूक अब्दुल्ला पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन मैं इसका (कश्मीरी पंडितों के घर छोड़ने के) जिम्मेदार नहीं हूं। जिम्मेदार वे हैं जो उस वक्त दिल्ली पर राज कर रहे थे।

कश्मीर फाइल्स फिल्म पर बोलते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अगर मसलों को सुलझाना है तो दिल जोड़ने वाली बात करनी होगी, यह फिल्म दिल जोड़ नहीं रही है, तोड़ रही है। सारे मुल्क में आग लगा रही है। अगर यह आग नहीं बुझाई गई तो यह सारे देश को एकदम शोले की तरह उड़ा देगी।

आगे फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैं पीएम मोदी से गुजारिश करूंगा कि ऐसी चीजें ना करें जिससे मुसलमान-हिंदुओं के रिश्ते और खराब हों। ऐसा हुआ तो मुल्क की सूरत ऐसी बन जाएगी जैसी हिटलर के जमाने में जर्मनी में हुई थी।

अपने ऊपर लग रहे आरोपों को फारूक अब्दुल्ला ने गलत बताया। वह बोले कि उस वक्त वहां मुखिया जगमोहन (जम्मू कश्मीर के राज्यपाल) थे। वह अब नहीं रहे लेकिन कश्मीरी पंडितों को उन्होंने निकलवाया। उनके घर पर उन्होंने गाड़ियां भेजीं, पुलिसवालों को इन लोगों को गाड़ियों में बैठाने को उन्होंने कहा था।

वह बोले कि करीब 800 खानदान (कश्मीरी पंडितों के) अभी भी कश्मीर में शांति से रह रहे हैं। किसी ने उनको हाथ नहीं लगाया, किसी ने उनको नहीं मारा।

फारूक ने कहा कि ए.एस दुल्ल्त (उस वक्त के रॉ प्रमुख), आरिफ मोहम्मद खान, मोहसर रजा (उस वक्त से चीफ सेक्रेटरी) से पूछा जाए कि कश्मीरी पंडितों के जाने के लिए कौन जिम्मेदार है, अगर ये लोग कहेंगे कि फारूक जिम्मेदार है तो मुझे जहां चाहें फांसी दे दें।

लेकिन पहले कमीशन बने, जो देखेगा कि कौन सही है और कौन गलत। वह देखेगा कि किसने चिति सिंह पोहरा किया, किसने कुपवाड़ा में हमारी बहनों का रेप किया। किसने मस्जिद से निकल रहे लोगों पर गोलियां चलाईं। फारूक अब्दुल्ला बोले कि केंद्र सरकार को दिल जोड़ने की कोशिश करनी होगी, यह फौज से नहीं किया जा सकता।

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