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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग छवि बनाने वाले कल्याण सिंह (Kalyan Singh) का निधन

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Kalyan Singh) जी का 21 अगस्त, शनिवार रात 9:15 पर देहांत हो गया। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एसजीपीजीआई में ली अंतिम सांस। डेढ़ महीने से बीमारी से ग्रसित कल्याण सिंह जी को 4 जुलाई को भर्ती कराया गया था। लम्बी बिमारी की वजह से धीरे धीरे करके उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया जिसके बाद उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था।

कल्याण सिंह जी (Kalyan Singh) को सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलग छवि बनाने और राजनितिक इतिहास में अहम भूमिका निभाने के कारण जाना जाता। 5 जनवरी 1932 में अतरौली जिले में जन्म लेने वाले कल्याण सिंह एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य थे। उन्होंने दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और संसद सदस्य के रूप में कार्य किया। वह दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्हें हिंदू राष्ट्रवाद और अयोध्या में राम मंदिर बनाने के आंदोलन का प्रतीक माना जाता था।

राम भक्त के रूप में प्रचलित

1980 में भले ही कल्याण सिंह को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उसके बाद ही वह एक लोकप्रिय नेता के रूप में उभरने लगे थे। कल्याण सिंह के बेहद करीबी रह चुके और हाल ही में केंद्रीय मंत्री बने भाजपा नेता बीएल वर्मा ने बताया, ” भारतीय जनता पार्टी के 1980 में गठन होने पर उन्हें पार्टी का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। अयोध्या आंदोलन में उन्होंने अपनी गिरफ्तारी देने के साथ ही कार्यकर्ताओं के नया मन में जोश भर दिया था।” इसी आंदोलन  में उनकी छवि राम भक्त के रूप में प्रचलित होने लगी थी। न सिर्फ प्रदेश में बल्कि पुरे देश में उनकी लोकप्रियता बढ़ गयी थी। इसी के बाद 1991 में भाजपा ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ यूपी में सरकार बनाई थी और कल्याण सिंह जी की लोकप्रिय होने की वजह से मुख्यमंत्री बनाया गया।

कल्याण सिंह के शासन में राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर पहुंच रहा था। इसी के नतीजे स्वरुप, 1992 में बाबरी विध्वंस हुआ। कल्याण सिंह ने विध्वंस करने वाले कार सेवकों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया। बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद उन्होंने भरी सभा में इसकी जिम्मेदारी ली और कहा – मस्जिद गिराए जाने की सजा देनी है तो मुझे दे दो, अधिकारियों ने बस मेरे आदेशों का पालन किया है।

इस घटना के बाद भारत की राजनीती ने एक अलग ही दिशा ले ली थी। न सिर्फ यूपी सरकार बल्कि केंद्र सरकार में भी जड़ें भी हिल गयी। इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने के बाद 6 दिसंबर 1992 को कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से स्तीफा दे दिया। उनका स्तीफे ने उनके राजनितिक छवि को कमज़ोर के विपरीत और मज़बूत बना दिया। वह दृढ़ता और बेबाक राजनेता के रूप में प्रचलित होने लगे जिससे उन्हें प्रधान मंत्री बनाने तक की चर्चा होने लगीं।

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दो बार बने प्रदेश के मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के कार्यकाल को पूरा करने वाले वह भाजपा के पहले नेता थे। भाजपा ने 1991 में हुए संसदीय और विधायी चुनावों में बड़ी बढ़त हासिल की और जून 1991 में कल्याण सिंह के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रही। मुख्यमंत्री के रूप में, सिंह ने एक कुशल प्रशासन चलाने का प्रयास किया, साथ ही अयोध्या में मंदिर निर्माण के आंदोलन के लिए मजबूत समर्थन व्यक्त किया। कल्याण सिंह सितंबर 1997 में दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, मायावती से उनके सत्ता-साझाकरण समझौते के हिस्से के रूप में पद ग्रहण किया। कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल भी थे।

21 अगस्त 2021 को बीमारी के चलते, 89 वर्ष की उम्र में कल्याण सिंह जी (Kalyan Singh) ने अपना देह त्याग दिया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा और भी कई नेताओ ने उनके देहांत पर शोक जाताया। उत्तर प्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक और 23 अगस्त को सार्वजानिक अवकाश का ऐलान किया।

AUTHOR – SHRADHA TIWARI

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