खुशखबरी! सरकार के इस एक फैसले से ‘कुंकिंग ऑयल’ के दामों में आएगी भारी गिरावट

नई दिल्ली। काफी समय से लोग कुकिंग ऑयल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर काफी परेशान है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने इस मामले में थोड़ी नरमी दिखाने का मन बनाया है, जिसे सभी को राहत मिलेगी। बताया जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला शनिवार को लिया। ऐसे में मुमकिन है कि सरकार के इस फैसले के बाद कुकिंग ऑयल के दामों में जल्द ही कुछ गिरावट देखने को मिलेगी। इसके अलावा सरकार के इस फैसले से देश में कुकिंग ऑयल को प्रोसेस करने वाली कंपनियों को भी काफी सपोर्ट मिलेगा।  

खबरों के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने शनिवार को क्रूड पाम ऑयल पर इफेक्टिव इम्पोर्ट ड्युटी को 8.25 फीसदी से घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया। क्रूड पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्युटी पहले से Nil है और अब सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने एक नोटिफिकेशन जारी कर एग्री इन्फ्रा डेवलपमेंट सेस को 7.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है।

बताया जा रहा है कि यह बदलाव 13 फरवरी, 2022 से प्रभावी हो गया है। एग्री डेवलपमेंट सेस और सोशल वेलफेयर सेस में इस कमी के बाद क्रूड पाम ऑयल पर इफेक्टिव इम्पोर्ट ड्युटी 8.25 फीसदी से घटकर 5.5 फीसदी पर आ गया है।

हालांकि, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी बी मेहता ने कहा कि सरकार ने क्रूड पाम ऑयल पर एग्री सेस को 7.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह स्वागत योग्य फैसला है, लेकिन घरेलू रिफाइनरियों को सपोर्ट देने के लिए काफी नहीं है। मेहता ने कहा कि SEA ने ड्युटी में कम-से-कम 11 परसेंट प्वाइंट्स का अंतर रखने का आग्रह किया है। इससे घरेलू रिफाइनरियों को किफायती तरीके से ऑपरेट करने में मदद मिलेगी।

बता दें, सीबीआईसी (CBIC) ने एक नोटिफिकेशन जारी कर क्रूड पाम ऑयल और अन्य क्रूड ऑयल पर इम्पोर्ट ड्युटी में की गई कमी की मियाद को और छह महीने तक बढ़ा दिया। इस तरह ड्युटी में की गई कमी 30 सितंबर तक लागू रहेगी।

इंडस्ट्री बॉडी SEA क्रूड पाम ऑयल और रिफाइंड पाम आयल पर लगने वाले इफेक्टिव ड्युटी के अंतर को 11 परसेंट प्वाइंट पर रखने की मांग करती रही है। इसकी वजह यह है कि रिफाइंड ऑयल के ज्यादा इम्पोर्ट से घरेलू रिफाइनरियों पर असर देखने को मिलता है। रिफाइंड पाम ऑयल पर इफेक्टिव इम्पोर्ट ड्युटी 13.75 फीसदी है।

वहीं पिछले साल कुकिंग ऑयल की कीमतें लगातार काफी ऊपर रहीं। इस वजह से सरकार ने विभिन्न मौकों पर पाम ऑयल पर इम्पोर्ट ड्युटी में कमी की। इससे घरेलू स्तर पर तेलों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली।

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