UP Election: ED छोड़ राजनीति में उतरे राजेश्वर सिंह, यहां से लड़ सकते हैं चुनाव

भारत को विश्व शक्ति और विश्व गुरु बनाने में मैं भी इस मिशन का भागीदार बनूंगा और दृढ़ विउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उलझनों के बीच लखनऊ में तैनाती के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक पद से वीआरएस लेने वाले राजेश्वर सिंह के सुलतानपुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट है। नगर में उनके प्रचार-प्रसार के लिए किराए पर मकान तक ले लिया गया है।

‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘साइबर जेम्स बांड की उपाधि पा चुके ईडी के पूर्व ज्वाइंट डॉयरेक्टर राजेश्वर सिंह ने चार कॉलम का अपना एक पत्र ट्विटर पर शेयर किया है। पत्र में कहा है कि ‘प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह संकल्प लिया है कि भारत को विश्व शक्ति और विश्व गुरु बनाना है। मैं भी इस मिशन का भागीदार बनूंगा और दृढ़ विश्वास में योगदान दूंगा।’

उन्होंने यह भी कहा कि अपने कार्यकाल में महिलाओं, बच्चों और पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश की है। उन्होंने ‘राष्ट्रीय प्रभाव और सार्वजनिक महत्व के कई घोटालों का खुलासा किया और कई जांच का हिस्सा भी रहे। इसमें टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील, एयरसेल मैक्सिस स्कैम, आम्रपाली घोटाला, नोकिया पोंजी घोटाला, गोमती रिवरफ्रंट फ्रॉड आदि शामिल हैं। इन मामलों में कई व्हाइट कॉलर अपराधियों को जेल की सजा मिली थी।

वर्ष 2009 में ईडी में प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे राजेश्वर सिंह

वर्ष 2009 में राजेश्वर सिंह प्रतिनियुक्ति पर ईडी में चले गए थे। ईडी में अपने कार्यकाल के दौरान अफेंडर्स के लगभग तीन हजार करोड़ रुपए के असेट्स को सीज किया। उनके नेतृत्व में ईडी ने टूजी स्पैक्ट्रम स्कैम में 223 करोड़, रेड्डी मामले में एक हजार करोड़, एयरसेल-मैक्सिस मामले में 750 करोड़, मधु कोड़ा मामले में तकरीबन 300 करोड़ के असेट्स सीज किए। पिछले साल अगस्त में वीआरएस के लिए आवेदन किया था। उनके अनुरोध के 6 महीने बाद संबंधित विभाग ने मामले का संज्ञान लिया और उन्हें वीआरएस के लिए अनुमति दी थी।

सहारा के मालिक को पहुंचवाया था जेल

मई 2011 में सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय, पत्रकार उपेंद्र राय और सुबोध जैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। राजेश्वर ने शिकायत की थी कि रॉय के साथ उपेंद्र और सुबोध जैन टूजी स्कैम में उनकी जांच में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस जांच के दायरे में सहारा ग्रुप के भी कुछ सौदे थे।

तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम पर की थी कार्रवाई

राजेश्वर सिंह से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला एयरसेल-मैक्सिस डील की जांच का है। उन्होंने इस सौदे को हरी झंडी देने के लिए तब के वित्त मंत्री चिदंबरम पर शिकंजा कसा। यह मामला विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से जुड़ा था। 2006 में एयरसेल-मैक्सिस डील को पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री के तौर पर मंजूरी दी थी।

सुलतानपुर के पखरौली के हैं मूल निवासी

वह जिले के कोतवाली देहात थाना अंतर्गत पखरौली गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ माइंस धनबाद से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट और लॉ और ह्यूमन राइट्स में भी डिग्री ली है। वो 1996 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। उनके एक भाई और एक बहन इनकम टैक्स कमिश्नर हैं। बहनोई राजीव कृष्ण आईपीएस हैं। इनके दूसरे बहनोई वाईपी सिंह भी आईपीएस थे। उन्होंने भी वीआरएस ले लिया था। पिता आरबी सिंह भी पुलिस विभाग में थे वह डीआईजी के पद से रिटायर हुए थे। पत्नी लक्ष्मी सिंह भी आईपीएस अधिकारी हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा और कानून समेत अलग-अलग मंत्रालयों को सिंह के कामकाज के तौर-तरीकों की जांच की शिकायतें मिलीं। उन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले के भी आरोप लगे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा लेकिन उन्होंने इनका डटकर मुकाबला किया।

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