लोक चौपाल की सांस्कृतिक श्रद्धांजलि में जुटे नामचीन कलाकार

भारत रत्न लता मंगेशकर, पद्मविभूषण बिरजू महाराज, संगीतकार बप्पी लहरी और पद्मश्री संध्या मुखर्जी को किया याद

लखनऊ। लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक लोक चौपाल में इस बार नामचीन कलाकारों ने भारत रत्न लता मंगेशकर, पद्मविभूषण बिरजू महाराज, संगीतकार बप्पी लहरी और ख्यातिलब्ध बांग्ला गायिका पद्मश्री संध्या मुखर्जी को सांस्कृतिक श्रद्धांजलि अर्पित की।

रविवार को कैण्ट के लाला लाजपतराय मार्ग स्थित बैलून लैण्ड में आयोजित कार्यक्रम में लता के गीत, बिरजू महाराज के गाये गीतों व ठुमरी पर भाव नृत्य, बप्पी लहरी के संगीत व संध्या मुखर्जी के गीतों की प्रस्तुति के साथ ही हाल ही में पद्मश्री हेतु चयनित वरिष्ठ साहित्यकार डा. विद्याविन्दु सिंह का अभिनन्दन भी किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत चौपाल चौधरी प्रो. कमला श्रीवास्तव ने गत दिनों दिवंगत हुए अमर कलाकारों की स्मृतियों को नमन करते हुए लता जी के सदाबहार गीत चन्दा रे जा रे जा रे की प्रस्तुति से किया। वरिष्ठ लोक गायिका पद्मा गिडवानी ने इचक दाना, वरिष्ठ लोक गायिका विमल पन्त आदि ने लता जी को अपनी सुर श्रद्धांजलि अर्पित की।

पद्मश्री डा. विद्याविन्दु सिंह ने कहा कि अक्षर, स्वर और नाद को ब्रह्म की संज्ञा दी गई है और इसके साधक कभी मरते नहीं। उन्होंने लता जी समेत हाल ही में दिवंगत हुई विभूतियों का स्मरण किया तथा स्वयं को मिले पद्मश्री सम्मान को लोक साहित्य, कला और संस्कृति का सम्मान बताया।

साहित्यकार डा. करुणा पांडे ने भारत रत्न लता गौरव मानवता उपवन की सौरभ कविता के माध्यम से अपनी भावांजलि दी।

जीजीआईसी विकास नगर की प्रधानाचार्य कुसुम वर्मा के संचालन में हुए सांस्कृतिक श्रद्धांजलि समारोह में लोक गायिका नीरा मिश्रा ने ऐ मेरे दिले नादां, सुषमा अग्रवाल और अयोध्या से आयीं वरिष्ठ कलाकार संगीता आहूजा ने रहे ना रहें हम महका करेंगे, लोक गायिका डॉ. भक्ति शुक्ला ने मोरनी बागां मा बोले आधी रात मा, अंबुज अग्रवाल ने भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना, संगीत शिक्षिका रीता पांडेय ने तू जहां जहां चलेगा मेरा साया, कनक वर्मा ने दुनिया में हम आये हैं तो जीना ही पड़ेगा, विजयलक्ष्मी ने एक राधा एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा, रश्मि उपाध्याय ने रजनीगंधा फूल तुम्हारे महके यूं ही जीवन में, डा. सुरभि सिंह ने मिलती है जिन्दगी में मोहब्बत कभी कभी, पल्लवी निगम ने चिट्ठी न कोई संदेश सुनाया। भजन गायक गौरव गुप्ता, रिंकी सिंह, एस.पी.साहू आदि ने भी सराहनीय प्रस्तुति दी।

ईशा-मीशा ने बिरजू महाराज के कम्पोजिशन इठलाती पर युगल कथक नृत्य के माध्यम से उन्हें नमन किया। कार्यक्रम संयोजक रेखा अग्रवाल व ज्योति किरन रतन ने बिरजू महाराज की प्रसिद्ध होली ठुमरी कहां खेलो कान्हा ऐसी होली गुंइयां पर भावनृत्य द्वारा अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये।

पद्मश्री संध्या मुखर्जी के गाये गीत राजा की आयेगी बारात को जब पद्मा गिडवानी ने स्वर दिया तो लोकनृत्य कलाकार कुसुम वर्मा ने नृत्य कर तालियां बटोरीं। वहीं लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अरुणा उपाध्याय, शारदा शुक्ला, डा. सरोजनी सक्सेना, मधु श्रीवास्तव, रीता श्रीवास्तव, सीमा सरकार, गगन शर्मा, त्र्यम्बकेश्वर त्रिवेदी, गगन शर्मा, जादूगर सुरेश, होमेन्द्र मिश्र, निशाकान्त द्विवेदी, सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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