काशी विश्वनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालु जल्द उठा पाएंगे इस सुविधा का लाभ

लखनऊ। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में अब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा उपलब्ध होगी। यह सुविधा है, कागज़ से तैयार चप्पलों की। दरअसल, इस मंदिर में चमड़े और रबर के जूतों व चप्पलों को पहनने की मनाही है। ऐसे में अभी लोगों को इतनी ठंड में भी नंगे पैर जाना पड़ता है। इसी कड़ी में बीते दिन यानी सोमवार को पीएम मोदी ने भी मंदिर में हाथ से तैयार कराई गई 100 जोड़ी चप्पलों को भिजवाया था। जिनका प्रयोग मंदिर में काम करने वाले कर्मचारी कर पाएंगे।

खबरों के मुताबिक़ खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने श्रद्धालुओं और कर्मचारियों को हाथ से बनी कागज की चप्पलें (स्लिपर) की बिक्री शुरू करने का फैसला किया है। सोमवार को यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मझोला उद्यम मंत्रालय की ओर से दी गई।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘काशी विश्वनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और मंदिर के कर्मचारियों को अब नंगे पांव मंदिर परिसर में प्रवेश करने की जरूरत नहीं होगी। 14 जनवरी से केवीआईसी हस्तनिर्मित कागज की चप्पलों की बिक्री शुरू करेगा।’’

ये चप्पलें काशी विश्वनाथ मंदिर के गलियारे में स्थित खादी दुकान पर उपलब्ध होंगी। इन चप्पलों को इस्तेमाल के बाद फेंका जा सकता है। यानी ये ‘यूज एंड थ्रो’ स्लिपर होंगी। बताया जा रहा है कि ये चप्पलें पर्यावरणानुकूल हैं और कम कीमत पर उपलब्ध होंगी।

बता दें, केवीआईसी का यह कदम ऐसे वक्त पर आया है, जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर के कर्मचारियों के लिए जूट से बनी चप्पलें भेजी हैं। दरअसल, पीएम को यह जानकारी मिली थी कि वहां काम करने वाले लोगों को नंगे पैर रहना पड़ता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मंदिर परिसर में चमड़े या रबड़ के जूते पहनने की मनाही है।

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