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योगी सरकार का कड़ा निर्देश,साइबर क्राइम थानों से होगी 24 घंटे सख्त निगरानी,साइबर अपराधियों की अब खैर नहीं

Publish Date:Tue, 27 Jul 2021 01:35 PM (IST) | Author: Abhay Kumar Mishra

अपराधी आधुनिक तरीके अपना कर जुर्म की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इस साल साइबर क्राइम के कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। इन अपराधों को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार ने साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए निर्देश जारी किया है। प्रदेश में साइबर क्राइम थानों की ओर से 24 घंटे सख्त निगरानी हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर खुले परिक्षेत्रीय साइबर क्राइम थानों की कार्रवाई में अब तक कुल 385 अभियुक्तों को गिरफ्तार करके साढ़े पांच करोड़ रुपये से अधिक की बरामदगी की गयी है।

इन थानों में अब तक कुल 528 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, उनमें से 126 अभियोग निस्तारित करते हुए कार्यवाही की गयी है। महिलाओं के साथ होने वाले साइबर अपराधों के निस्तारण के लिए हर साइबर थाने में महिला साइबर क्राइम सेल भी संचालित हो रहा है। सभी थानों को पर्याप्त उपकरण व संसाधनों की व्यवस्था की गयी है। शासन ने 32 करोड़ 80 लाख रुपये की धनराशि दी, इससे डाटाबेस मैनेजमेंट, फारेंसिक टूल्स, डेटा एनेलिसिस साफ्टवेयर आदि की व्यवस्था की गई है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि अब तक NCCRP पोर्टल पर कुल 49779 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनका निस्तारण संबंधित जिलों व साइबर क्राइम थानों की ओर से कराया जा रहा है।

वास्तविक से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर युवाओं से लाखों की ठगी करने वाले गिरोह को साइबर क्राइम यूपी की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपित नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को झांसे में लेकर उनके खाते की जानकारी हासिल कर रुपये हड़प लेते थे। पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम त्रिवेणी सिंह के मुताबिक गिरोह के सरगना समेत तीन लोगों को पकड़ा गया है।

पूछताछ में आरोपितों ने बताया है कि उन्होंने ऑनलाइन जॉब पोर्टल से नौकरी तलाश करने वाले लोगों का डेटा प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद वास्तविक वेबसाइट की जगह फर्जी वेबसाइटके माध्यम से लोगों खातों का गोपनीय डाटा चोरी करते थे। गिरफ्तार किए गए भरत नगर दिल्ली निवासी अमर श्रीवास्तव, मुदित शर्मा और कल्याणपुर कानपुर निवासी विष्णु शर्मा ने साउथ सिटी निवासी दीपा यादव से भी एक लाख रुपये हड़प लिए थे। दीपा ने साइबर क्राइम सेल में शिकायत की थी।

पड़ताल के दौरान पुलिस ने तीनों आरोपितों को दबोच लिया। पूछताछ में तीनों ने बताया कि उन्होंने रोहिणी दिल्ली में किराए का फ्लैट लेकर फर्जीवाड़ा शुरू किया था। दीपा से भी ठगों ने फोन पर बात कर नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। आरोपितों के पास से दो लैपटाप, 11 मोबाइल फोन, 15 एटीएम कार्ड व वेबसाइट डाटा समेत अन्य सामान बरामद किए गए हैं। आरोपितों ने वेबसाइट ऐसे डिजाइन की थी, जिससे वह लोगों की बैंक संबंधी हासिल कर सकें।

क्या है साइबर अपराध ?

साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जिस में कंप्यूटर और नेटवर्क शामिल है। किसी भी कंप्यूटर का अपराधिक स्थान पर मिलना या कंप्यूटर से कोई अपराध करना कंप्यूटर अपराध कहलाता है। कंप्यूटर अपराध मे नेटवर्क शामिल नही होता है। किसी कि निजी जानकारी को प्राप्त करना और उसका गलत इस्तमाल करना। किसी की भी निजी जानकारी कंप्यूटर से निकाल लेना या चोरी कर लेना भी साइबर अपराध है।

कंप्यूटर अपराध भी कई प्रकार से किये जाते है जैसे कि जानकारी चोरी करना, जानकारी मिटाना, जानकारी मे फेर बदल करना, किसी कि जानकारी को किसी और देना या कंप्यूटर की भागो को चोरी करना या नष्ट करना। साइबर अपराध भी कई प्रकार के है जसे कि स्पैम ईमेल, हैकिंग, फिशिंग, वायरस को डालना, किसी की जानकारी को ऑनलाइन प्राप्त करना या किसी पर हर वक़्त नजर रखना।

कंप्यूटर अपराध के प्रकार

जानकारी चोरी करना– किसी के भी कंप्यूटर से उसकी निजी जानकारी निकालना जेसे की उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड।
जानकारी मिटाना– किसी के कंप्यूटर से जानकारी मिटाना ताकी उसे नुकसान हो या कोई जरूरी जानकारी को मिटाना।
बाहरी नुकसान– भागो को नष्ट करना, उसे तोडना या भागो की चोरी करना भी कंप्यूटर अपराध मे आता है।


साइबर अपराध के प्रकार

स्पैम ईमेल– अनेक प्रकार के ईमेल आते है जिसमें एसे ईमेल भी होते है जो सिर्फ कंप्यूटर को नुकसान पहुचाते है। उन ईमेल से सारे कंप्यूटर में खराबी आ जाती हैं।


हैकिंग– किसी की भी निजी जानकारी को हैक करना जेसे की उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड और फिर उसमे फेर बदल करना।


साइबरफिशिंग– किसी के पास स्पैम ईमेल भेजना ताकी वो अपनी निजी जानकारी दे और उस जानकारी से उसका नुकसान हो सके। यह इमेल आकार्षित होते है।

वायरस फैलाना -साइबर अपराधी कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर आपके कम्प्युटर पर भेजते हैं जिसमें वायरस छिपे हो सकते हैं, इनमें वायरस, वर्म, टार्जन हॉर्स, लॉजिक हॉर्स आदि वायरस शामिल हैं, यह आपके कंप्‍यूटर को काफी हानि पहुॅचा सकते हैं।


सॉफ्टवेयर पाइरेसी – सॉफ्टवेयर की नकल तैयार कर सस्‍ते दामों में बेचना भी साइबर क्राइम के अन्‍तर्गत आता है, इससे साफ्टवेयर कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है साथ ही साथ आपके कीमती उपकरण भी ठीक से काम नहीं करते हैं।


फर्जी बैंक कॉल– आपको जाली ईमेल, मैसेज या फोन कॉल प्राप्‍त हो जो आपकी बैंक जैसा लगे जिसमें आपसे पूछा जाये कि आपके एटीएम नंबर और पासवर्ड की आवश्यकता है और यदि आपके द्वारा यह जानकारी नहीं दी गयी तो आपको खाता बन्‍द कर दिया जायेगा या इस लिंक पर सूचना दें। याद रखें किसी भी बैंक द्वारा ऐसी जानकारी कभी भी इस तरह से नहीं मॉगी जाती है और भूलकर भी अपनी किसी भी इस प्रकार की जानकारी को इन्‍टरनेट या फोनकॉल या मैसेज के माध्‍यम से नहीं बताये।


सोशल नेटवर्किग साइटों पर अफवाह फैलाना – बहुत से लोग सोशल नेटवर्किग साइटों पर सामाजिक, वैचारिक, धार्मिक और राजनैतिक अफवाह फैलाने का काम करते हैं, लेकिन यूजर्स उनके इरादें समझ नहीं पाते हैं और जाने-अनजाने में ऐसे लिंक्‍स को शेयर करते रहते हैं, लेकिन यह भी साइबर अपराध और साइबर-आतंकवाद की श्रेणी में आता है।


साइबर बुलिंग – फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग पर अशोभनीय कमेंट करना, इंटरनेट पर धमकियॉ देना किसी का इस स्‍तर तक मजाक बनाना कि तंग हो जाये, इंटरनेट पर दूसरों के सामने शर्मिंदा करना, इसे साइबर बुलिंग कहते हैं। अक्‍सर बच्‍चे इसका शिकार हाेते हैं। इससे इनके सेहत पर भी असर पडता है।

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