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यूपी में कई कांग्रेसी नेता जल्द छोड़ सकते हैं पार्टी:पूर्वांचल में कांग्रेस के एक दिग्गज अन्य दलों के संपर्क में

उत्तर प्रदेश में अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस पार्टी अपने पुराने साथियों को ही उचित सम्मान नहीं दे पा रही है। इसके चलते कांग्रेस में पीढ़ियों से जुड़े दिग्गज नेता एक-एक कर पार्टी को अलविदा कह रहे हैं। अब तक दो दर्जन से ज्यादा कांग्रेसी दिग्गज पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। इतना ही नहीं अभी भी कई बड़े़ नेता दूसरी पार्टियों के सम्पर्क में हैं और कांग्रेस को जल्द ही अलविदा कर सकते हैं।

अभी तीन दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के परपोते व पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी ने भी कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया। लगातार चौथी पीढ़ी तक कांग्रेस की सेवा करने वाले ललितेशपति त्रिपाठी ने भी पार्टी छोड़ने की वजह महज सम्मान न मिलना बताया है।

कांग्रेस यूपी में 32 साल से सत्ता से दूर है। वर्ष 2022 के शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने ही बचे हैं। इसको लेकर सभी पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुट गयी हैं, लेकिन कांग्रेस जबरदस्त अंतर्कलह से जूझ रही है। कांग्रेस के बड़े-बडे़ दिग्गज नेता पार्टी से नाता तोड़ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओं का एक ही आरोप है कि उन्हें पार्टी में उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। इसमें तमाम तो ऐसे नेता है जिनकी कई-कई पीढ़ियां कांग्रेस के लिए समर्पित रहीं।

दो दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी
प्रियंका गांधी वाड्रा के उत्तर प्रदेश प्रभारी बनने और अजय कुमार लल्लू के प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद से ही लगभग दो दर्जन बड़े नेता कांग्रेस से नाता तोड़ चुके हैं। कुछ नेता ऐसे भी हैं जो घर में बैठ गए हैं। लल्लू के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पूर्व मंत्री स्व. राम कृष्ण द्विवेदी, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व एमएलसी सिराज मेंहदी, पूर्व सांसद व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष युवक कांग्रेस ड़ा. संतोष सिंह, पूर्व महामंत्री संजीव सिंह व मनरेगा के चेयरमैन रहे संजय दीक्षित समेत ज्यादातर ने या तो पार्टी छोड़ दी या फिर चुपचाप पार्टी से किनारा कर लिया है।

अमेठी में कांग्रेस का स्तम्भ माने जाने वाले पूर्व सांसद ड़ा. संजय सिंह ने भी पार्टी में उचित सम्मान न मिलने के कारण कांग्रेस को अलविदा कह दिया और भाजपा के साथ चले गए।

अमेठी-रायबरेली के दिग्गजों का भी मोहभंग
युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नदीम अशरफ जायसी व पूर्व संगठन मंत्री सरबजीत सिंह मक्कड़ ने भी महज सम्मान न मिलने के कारण कांग्रेस छोड़ दी। कांग्रेस की मजबूत जमीन कही जाने वाली रायबरेली में भी पार्टी को बड़ा झटका लग चुका है।

राय बरेली से कांग्रेस के एमएलसी रहे दिनेश प्रताप सिंह काफी पहले ही पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विरुद्ध भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ चुके हैं। यहां कांग्रेस के दो विधायक राकेश प्रताप सिंह व अदिति सिंह भी पार्टी के साथ नहीं हैं। कांग्रेस की बड़ी नेता व उन्नाव की पूर्व सांसद अनु टंड़न को भी पार्टी सम्मान नहीं दे सकी और उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी।

चार पीढ़ी से जुड़े दो ब्राह्मण नेताओं ने छोड़ी पार्टी
शाहजहांपुर व आसपास के जिलों में अपनी अलग पहचान रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को भी पार्टी उचित सम्मान न दे सकी और वह भी बीते दिनों कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ हो गये। जितिन के पिता जितेन्द्र प्रसाद भी कांग्रेस के दिग्गज नेता थे। वे पार्टी और कांग्रेस की सरकारों में विभिन्न पदों पर रहे।

जितिन प्रसाद के बाद कांग्रेस के यूपी में दूसरे बड़े ब्राह्मण नेता पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी भी कांग्रेस छोड़ चुके हैं। इन दोनों ही नेताओं का परिवार चार पीढ़ियों से कांग्रेस से जुड़ा था। इन दो बड़े नेताओं के जाने के साथ ही इनसे जुड़े जिला व तहसील स्तर के कई बड़े पार्टी नेताओं ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस के कुछ अन्य बड़े नेता भी दूसरी पार्टियों के लगातार संपर्क में हैं। इनमें पूर्व विधायकों से लेकर कांग्रेस के मौजूदा विधायक तक शामिल हैं। चुनाव से पहले इन लोगों के भी दूसरी पार्टियों में शामिल होने की पूरी संभावना है। जाहिर है कि कांग्रेस इन नेताओं को तभी रोक पाएगी, जब वह अपनी अंदरूनी कलह को दूर करे और इन नेताओं को उचित सम्मान दे।

पूर्वांचल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी दूसरे दल के सम्पर्क में
पूर्वांचल में कांग्रेस के एक कद्दावर नेता और राज्य के प्रभारी दूसरे दल के संपर्क में हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2022 चुनाव से पहले यह किसी दूसरे दल में जाने की तैयारी कर चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर वाराणसी में कांग्रेस के नेता ललितेश पति त्रिपाठी के प्रतिद्वंदी माने जाने वाले एक ब्राह्मण नेता भी दूसरे दल के संपर्क में हैं।

इसके अलावा कांग्रेस के बुंदेलखंड के एक नेता भी दिल्ली में दो से तीन बार वरिष्ठ भाजपा नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन, भाजपा की ओर से ग्रीन सिग्नल न मिलने के चलते वे अभी अपनी मूल पार्टी में ही बने हुए हैं।

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