अश्विनी कुमार के इस्तीफे से कांग्रेसी खेमें में हलचल… ‘मामला गंभीर, आत्मनिरीक्षण की जरूरत’

नई दिल्ली। हाल ही में आई खबर कि कांग्रेस के दिग्गज नेता और सोनिया गांधी के वफादार वरिष्ठ कांग्रेस नेता अश्विनी कुमार ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि, इस मामले में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक चुप्पी साधी हुई है, लेकिन कांग्रेस के ही एक समूह ‘जी-23’ के नेताओं ने इस बात को लेकर पार्टी में बड़ी गड़बड़ का इशारा दिया है। अश्विनी कुमार के इस्तीफे के मामले पर इस समूह का कहना है कि यह इस्तीफा इस बात का संकेत देता है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। यह पार्टी के लिए चिंता का विषय है। इस मामले में पार्टी को आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है।

बता दें कि अश्विनी कुमार जैसे बड़े लीडर द्वारा पार्टी छोड़ने को लेकर कांग्रेस आलाकमान भले ही खामोश हो लेकिन ग्रुप 23 के नेताओं ने एक बार फिर से अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि पार्टी इसे सामान्य तरीके से नहीं ले सकती। गंभीरता से इसे लेना होगा।

खबरों के मुताबिक़ पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी से वरिष्ठ नेताओं का बाहर होना “गंभीर चिंता का विषय” है।

गुलाम नबी आजाद, राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि समय आ गया है कि पार्टी गंभीर और गंभीर आत्मनिरीक्षण करे।

बता दें कि ये तीनों ग्रुप-23 में भी शामिल हैं। गौरतलब है कि जी-23 ने अगस्त 2020 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था, जिसमें पार्टी में बड़े स्तर पर बदलाव का आह्वान किया गया था।

वहीं आजाद ने एक समाचार पत्र से कहा कि यह बहुत चिंता की बात है कि एक के बाद एक नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। अश्विनी कुमार चौथे या पांचवें पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता आजाद ने कहा कि इस दशा में बहुत आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है।

आजाद ने कहा कि यह कहना ठीक नहीं है कि ये नेता किसी व्यक्ति या पार्टी के इशारे पर कांग्रेस छोड़ रहे हैं। पार्टी के भीतर कुछ चीजें कट्टर कांग्रेसी नेताओं को भी असहज कर देती है। वहीं मनीष तिवारी ने कहा कि यह ऐसा होना पार्टी के लिए दुखद है। तिवारी ने कहा कि अश्विनी कुमार और मैंने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में एक साथ काम किया। कई मुद्दों पर उनके और मेरे बीच सभ्य मतभेद रहे हैं। एक कार्यकर्ता द्वारा पार्टी छोड़ने की भी दशा में आत्मनिरीक्षण होना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button