छात्रसंघ से लेकर सीएम की कुर्सी तक ऐसे पहुंचे योगी आदित्यनाथ

छात्रसंघ का चुनाव हार गए थे योगी आदित्यनाथ, पढ़ें पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिनके नाम से माफियाओं और अपराधियों की रुह कांप जाती है। सीएम योगी अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के लिए यमराज हैं। इनके शासन काल में अपराध करने वाले अपराधी भी कांपते हैं। बता दें कि हाल ही में योगी सरकार ने माफियाओं से कब्जा मुक्त सरकारी जमीन पर गरीबों के लिए घर बनाने का फैसला लिया है।

खबरों के अनुसार सीएम योगी ने जबसे संसदीय राजनीति में कदम रखा है, तबसे उन्हें हार का मुंह नहीं देखना पड़ा है। साल 1998 में अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ के उत्तराधिकारी के तौर पर 26 साल की उम्र में उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा। गोरखपुर की संसदीय सीट से योगी आदित्यनाथ को बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए उतार दिया गया था।

तो आइए जानते हैं सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की क्या है पूरी कहानी…

राजनीति में प्रवेश करने के बाद योगी कभी चुनाव नहीं हारे लेकिन उनका जीवन हार से एकदम शून्य है, ऐसा भी नहीं है। योगी आदित्यनाथ जब अजय सिंह बिष्ट थे और छात्र राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे थे, तब उन्हें एक बार हार का सामना करना पड़ा था।

यह साल 1992 की बात है, जब अजय सिंह बिष्ट कोटद्वार के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में सचिव के पद पर वह निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे। इस चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

छात्र राजनीति में काफी ऐक्टिव

अजय की एक बहन कौशल्या के पति कोटद्वार की छात्र राजनीति में काफी ऐक्टिव थे। अजय की रूचि राजनीति में थी। उनके जीजाजी ने उन्हें भी एसएफआई में शामिल होने के लिए कहा लेकिन अजय ने छात्र राजनीति के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को चुना। वह एबीवीपी में शामिल हो गए। उन्होंने स्नातक के द्वितीय वर्ष की पढ़ाई के दौरान सचिव पद पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। एबीवीपी से टिकट की मांग की तो इनकार मिला। इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ना स्थगित कर दिया।

एबीवीपी ने नहीं दिया टिकट

बीएससी की पढ़ाई के तीसरे वर्ष में अजय ने फिर एबीवीपी से टिकट की मांग की तो पता चला कि उनके एक सहकर्ता पद्मेश बुडलाकोटी भी टिकट के उम्मीदवार हैं। दोनों में खींचतान बढ़ी तो संगठन के पदाधिकारियों ने तीसरे छात्र दीप प्रकाश भट्ट को टिकट दे दिया।

योगी इससे काफी नाराज हुए और बागी बनते हुए निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इस चुनाव में न तो एबीवीपी का उम्मीदवार जीता और न ही अजय सिंह बिष्ट। अरुण तिवारी नाम के जिस शख्स को इस चुनाव में जीत मिली, वह फिलहाल समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

ऐसे बदली जिंदगी

अजय सिंह बिष्ट को अपने जीवन के इस पहले चुनाव में हार मिली। चुनाव में हार से अजय बिष्ट काफी व्यथित हो गए थे। जिसके बाद वह गोरखनाथ पीठ के महंत अवेद्यनाथ के पास मदद मांगने गए। यहीं से ऐसे घटनाक्रम बने, जिसकी परिणति में अजय सिंह बिष्ट योगी आदित्यनाथ के रूप में उभरकर सामने आए।

लगातार 5 बार सांसद

सीएम योगी 1998 में पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट से चुनाव लड़े और जीत गए थे। 12वीं लोकसभा चुनाव में वो सबसे कम उम्र (26 वर्ष) के सांसद थे। 1998 से लेकर मार्च 2017 तक योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद रहे। 2017 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा सीट से लगातार 5 बार सांसद चुने गए हैं।

बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं, हिंदू युवा वाहिनी संगठन हिन्दू युवाओं का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह है।

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