‘अयोध्या जमीन विवाद’ पर सीएम के तेवर तल्ख, कहा- सख्ती से जांच कर पेश करें रिपोर्ट

लखनऊ। एक ओर जहां बीते चुनाओं तक सियासी दलों के पास सत्ता पक्ष को घेरने के लिए विवादित बाबरी और राम मंदिर निर्माण का मुद्दा था। वहीं अब राम मंदिर निर्माण की मंजूरी के बाद अयोध्या में जमीनी खरीद-फरोख्त का मामला मुंह उठाने लगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर के आस-पास कई जमीनों को खरीदा गया है। ये जमीनें अधिकारी से लेकर पुलिस अफसर, नेता व उनके परिवारवालों तक ने खरीदी है।

ऐसे में विपक्ष का आरोप हैं कि सत्ता पक्ष के इशारे पर इन जमीनों को खरीदा जा रहा है, फिर उन्हें ट्रस्ट और राम मंदिर निर्माण के नाम पर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। विपक्षियों की इसी बात का जवाब देते हुए सीएम योगी ने मामले की सख्ती से जांच कराने के निर्देश दे दिए हैं।

खबरों के मुताबिक़ चुनावों से ठीक पहले इस मामले को तूल पकड़ता देख इस मामले में योगी सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही उन्होंने पांच दिन के अंदर जांच की रिपोर्ट भी मांगी है।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले की जांच विशेष सचिव राधेश्याम मिश्रा द्वारा करवाने का फैसला लिया है। उन्हें कहा गया है कि पांच दिन के अंदर विस्तृत जांच करनी है और रिपोर्ट सौंपनी है।

अब चुनावी मौसम में राज्य सरकार की इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि राम मंदिर के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। कई करीबियों का फायदा हो रहा है। 

वहीं कई समाचार पत्रों और न्यूज न्यूज वेबसाइटों ने भी इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई बड़े अधिकारियों ने औने-पौने दाम पर अयोध्या में जमीन खरीदी थीं। इस लिस्ट में अयोध्या में कमिश्नर रहे एमपी अग्रवाल, मेयर ऋषिकेश उपाध्याय, आईपीएस दीपक कुमार, रिटायर्ड आईएएस उमा धर द्विवेदी, पीपीएस अरविंद चौरसिया द्वारा खरीदी गई जमीनें शामिल है।

इसके अलावा यह भी जानकारी दी गई है कि गोसाईगंज से विधायक रहे विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी ने महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से 30 लाख रुपए में 2593 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। वहीं खब्बू तिवारी के बहनोई राजेश मिश्रा ने राघवाचार्य के साथ मिलकर बरहेटा गांव में 6320 वर्ग मीटर जमीन 47.40 लाख रुपए में खरीदी।

अयोध्या के एक अन्य विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने दिसंबर 2020 में सरयू नदी के पार गोंडा के महेशपुर में 4 करोड़ में 14860 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। वहीं इनके भतीजे तरुण मित्तल ने नवंबर 2019 में बरहटा माझा में 5174 वर्ग मीटर जमीन 1.15 करोड़ रुपए में खरीदी। अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य बलराम मौर्या ने अयोध्या मंदिर निर्माण स्थल से 5 किलोमीटर दूर गोंडा के महेशपुर गांव में ₹50लाख में 9375 वर्ग मीटर जमीन खरीदी।

अयोध्या में कमिश्नर रहे एमपी अग्रवाल के ससुर केपी अग्रवाल ने दिसंबर 2020 में महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से 31 लाख रुपए में 2530 वर्ग मीटर जमीन बरेटा माझा गांव में खरीदी। वहीं अग्रवाल के बहनोई आनंद वर्धन ने महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से ही 15.50 लाख रुपए में 1260 वर्ग मीटर जमीन ली। अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने तो फैसला आने से 2 महीने पहले ही सितंबर 2019 में 30 लाख रुपए में 1480 वर्ग मीटर जमीन खरीद ली थी। वहीं जुलाई 2018 में ऋषिकेश उपाध्याय ने अयोध्या के काजीपुर चितवन में दान के रुप में 2530 वर्ग मीटर जमीन ली, जिसकी कीमत एक करोड़ से अधिक बताई जाती है।

इतना ही नहीं अयोध्या में तैनात रहे एडिशनल एसपी अरविंद चौरसिया के ससुर संतोष चौरसिया ने जून 2021 में रामपुर हलवारा गांव में ₹4लाख में 126.48 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। डीआईजी रहे दीपक कुमार के ससुराल पक्ष ने भी 1020 वर्ग मीटर जमीन महर्षि रामायण ट्रस्ट सहित 19 लाख ₹75000 में ली है।

हालांकि दीपक कुमार जमीन के सौदे के वक्त अयोध्या में तैनात नहीं थे। इस संबंध में डीआईजी रेंज अलीगढ़ दीपक कुमार का कहना है कि उनका इस जमीन की खरीद-फरोख्त से कोई लेना देना नहीं है, ना ही उनकी जानकारी में रहा है और ना ही उनकी तैनाती के वक्त इसका कोई सौदा हुआ। बताया जा रहा है कि इन लोगों में से कई ने तो जमीन खरीदने की बार को स्वीकार किया है। वहीं कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस बात से साफ इनकार किया है। मगर, हकीकत क्या है? इस बात का पता लगाने के लिए अब यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच के सख्त निर्देश दे दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट पांच दिनों में तलब की है। अब अन्य में इस मामले का क्या निष्कर्ष निकल कर सामने आता है, यह तो जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही पता चलेगा।

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