ऐन वक्त पर टूटा सीजफायर, मायूस भारतीय छात्रों को करनी पड़ी बंकरों में वापसी

नई दिल्ली रूस और यूक्रेन में जारी जंग अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है। हालत दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसे में यूक्रेन में फंसे छात्रों को वतन वापस लाना मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि भारत सरकार के प्रयासों से अभी तक करीब 16 हजार भारतीयों को वतन वापस लाया जा चुका है। मगर, अभी भी बहुत से छात्र यूक्रेन के अलग-अलग इलाकों में फंसे हैं और देश वापसी का इंतजार देख रहे हैं। इस कड़ी में कल यानी सोमवार को रूस के सीजफायर के ऐलान के बाद सुमि से 700 भारतीयों छात्रों को निकालने की तैयारी थी, लेकिन अं वक्त पर सीजफायर टूट गया और उन भारतीय छात्रों को दोबारा बंकरों में शरण लेने जाना पड़ा।

खबरों के मुताबिक़ रूस की सीमा से महज 60 किलोमीटर दूर सुमी में दोनों देशों की सेनाओं में भारी संघर्ष हो रहा है। बमबारी और गोलीबारी लगातार हो रही है। सरकार यहां फंसे भारतीयों को निकालने की कोशिश कर रही है, लेकिन संघर्ष के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। 

यहां फंसे नागरिकों को बाहर निकालने के लिए रूस की ओर से सीजफायर का ऐलान किया गया था। फंसे भारतीयों को निकालने के लिए बसें पहुंच चुकी थीं। घंटों इंतजार के बाद बस में सवार होने वाले ही थे कि तभी सीजफायर टूट गया और छात्रों को फिर से बंकरों में जाने की सलाह दी गई।

सुमी में फंसे एक भारतीय आशिक हुसैन ने न्यूज एजेंसी से कहा, ‘हम कड़ाके की सर्दी में तीन घंटे तक लाइन में खड़े रहे, बस में बैठने का इंतजार कर ही रहे थे और बाद में बोल दिया गया कि हम नहीं जा सकते, ये सब कम खत्म होगा? हमारी इच्छाशक्ति गिर रही है। मनोबल टूट रहा है। हम अपडेट का अब भी इंतजार कर रहे हैं।’

25 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट जिस्ना जीजी ने बताया, ‘इंडियन एंबेसी ने हमें पोल्तावा ले जाने के लिए 5-6 बसें भेजी थीं। हम बस में सवार हो गए थे, लेकिन सीजफायर टूटने के कारण हमें उतरने के लिए कहा गया। एंबेसी ने हमसे इंतजार करने को कहा है।’

फोर्थ ईयर के मेडिकल स्टूडेंट अजीत गंगाधरन ने कहा, ‘हम पैदल जाने के लिए निकलने ही वाले थे, लेकिन हमें एंबेसी ने रूकने और कोई रिस्क न लेने को कहा। हम वापस लौट रहे हैं। लेकिन कब तक?’ उन्होंने कहा, ’10 दिन से हम यहां इंतजार कर रहे हैं और हमें बाहर निकलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।’

गंगाधरन ने ये भी बताया कि यहां बिजली नहीं है, पानी नहीं है और दुकानों में क्रेडिट कार्ड भी नहीं लिया जा रहा है, ATM से भी नकदी खत्म हो गई है। एक छात्रा ने बताया कि वो वहां खाने-पीने और जरूरी सामान भी नहीं खरीद पा रहीं हैं। शनिवार को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सुमी में मौजूद हताश भारतीय छात्र पैदल ही रूसी सीमा की ओर निकलते दिख रहे थे। इसके बाद सरकार ने उन्हें शेल्टर में ही रहने को कहा और भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्दी ही निकाल लिया जाएगा।

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