LIC में विदेशी निवेश को कैबिनेट की हरी झंडी, पढ़ें तय प्रतिशत की पूरी डिटेल

नई दिल्ली। निवेशकों की बढ़ती रूचि को देखते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय जीवन बीमा निगम में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को हरी झंडी दिखा दी है। शनिवार को इस बात की जानकारी सामने आई। हालांकि इससे पहले इस बात को लेकर चर्चा थी कि यूक्रेन संकट को देखते हुए शेयर बाजार में दबाव के साथ एलआईसी आईपीओ को भी आगे के लिए टाला जा सकता है।

खबरों के मुताबिक़ एलआईसी में 20 प्रतिशत तक विदेशी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. इसमें यह भी तय हुआ है कि एलआईसी सहित जितने भी कोर्पोरेशन होंगे भविष्य में उनके लिए भी FDI का प्रावधान यही रहेगा.

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने वित्त मंत्रालय से विचार लेने के बाद प्रस्ताव रखा जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दी. भारत सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में 74% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की परमिशन दी है, लेकिन यह LIC पर लागू नहीं होता है, जो LIC अधिनियम द्वारा शासित है.

सरकार एलआईसी आईपीओ भी ला रही है. सरकार को उम्मीद है कि कंपनी मार्च आखिर तक लिस्ट हो जाएगी. एलआईसी अधिनियम में विदेशी निवेश की चर्चा नहीं है. साथ ही, सिर्फ केंद्र सरकार को कंपनी में 5% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की परमिशन है.

देश की अब तक की सबसे बड़ी आईपीओ को पेश करने के लिए LIC ने 13 फरवरी को 63,000 करोड़ रुपये में 5 फीसदी की हिस्सेदारी बेचने के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर जमा किया है.

जानकारी के मुताबिक 31.6 करोड़ से अधिक शेयरों या 5 फीसदी की हिस्सेदारी के IPO के मार्च तक आने की संभावना है. इस आईपीओ में एलआईसी के कर्मचारियों और पॉलिसी होल्डर्स को फ्लोर प्राइस पर छूट मिलेगी.

बता दें, एलआईसी का यह पब्लिक इश्यू के भारतीय शेयर मार्केट के इतिहास में सबसे बड़े आईपीओ होगा. जिसके बाद एलआईसी की मार्केट वैल्यू रिलायंस और टीसीएस जैसी टॉप कंपनियों के बराबर होगी. बाजार नियामक सेबी के नियमों के अनुसार, आईपीओ पेशकश के तहत एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) और एफडीआई दोनों की अनुमति है।

चूंकि एलआईसी अधिनियम में विदेशी निवेश के लिये कोई प्रावधान नहीं है, अत: विदेशी निवेशक भागीदारी के संबंध में प्रस्तावित एलआईसी आईपीओ को सेबी के मानदंडों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है। लिहाजा एलआईसी विदेशी निवेश को मंजूरी देना जरूरी था।

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