जहांगीरपुरी में बुल्डोजर को मिलेगा ग्रीन सिग्नल या लगा रहेगा ब्रेक? SC पर टिकी सभी की निगाहें

नई दिल्ली। हनुमान जयंती के दिन दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा के बाद दिल्ली MCD द्वारा अवैध निर्माण को हटाए जाने को लेकर जो कार्रवाई की गई, उसे लेकर अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। बता दें, बीते दिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली MCD के बुल्डोजर कार्रवाई को रोक दिया गया। हालांकि, आदेश आने से पूर्व तक इस कार्रवाई के तहत कई अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए गए थे। वहीं इस संबंध में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दो याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थीं, जिस पर आज सुवाई चल रही है।

खबरों के मुताबिक़ दिल्ली के जहांगीरपुरी में एमसीडी द्वारा अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर बुलडोजर चलाने के मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में हो रही है। शीर्ष अदालत की दो जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जहांगीरपुरी में एमसीडी की इस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल कर रखी हैं। पहली याचिका में बिना नोटिस दिए बुलडोजर चला कर स्थानीय नागरिकों को उनके मौलिक नागरिक अधिकार से वंचित करने की बात कही गई है।

वहीं दूसरी याचिका में देश के कई राज्यों में किसी भी मामले में अचानक बुलडोजर चलाने की सरकार की प्रवृति पर रोक लगाने की मांग की गई है।

दरअसल कल उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत जहांगीरपुरी में  बुलडोजर के जरिए एक मस्जिद के पास कई ढांचों को तोड़ दिया गया। तोड़फोड़ के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर एक याचिका पर संज्ञान लेने के बाद उच्चतम न्यायालय को अभियान को रुकवाने के लिए दो बार हस्तक्षेप करना पड़ा।

एनडीएमसी द्वारा अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अभियान शुरू करने के साथ ही इस इलाके में दंगा रोधी टुकड़ियों सहित सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात थे। दो घंटे से भी कम समय में, कई दुकानों और अवैध ढांचों को गिरा दिया गया। कुछ दुकान के मालिकों ने यह भी कहा कि उनके प्रतिष्ठानों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और स्थानीय नगर निगम की मंजूरी मिली हुई थी।

वहीं इस अभियान पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि ‘नफरत के बुलडोजर’ को रोका जाए और ऊर्जा संयंत्रों को शुरू किया जाए। एनडीएमसी की कार्रवाई रुकवाने के लिए अदालत का आदेश लेकर वहां पहुंचने वालीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने नाराजगी जताई।

फिलहाल, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और उम्मीद की जा रही हैं कि जल्द ही इस पर कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। ऐसे में सभी की निगाहें इस वक्त कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है कि क्या कोर्ट बुल्डोजर कार्रवाई को हरी झंडी दिखाएगा। या फिर बुल्डोजर पर ब्रेक लगा दिया जाएगा। बुलडोजर से कई दुकानों और सड़क के किनारे बनी गुमटियों को गिराए जाने से परेशान कुछ महिलाएं सड़क पर बैठी रो रही थीं। सड़कों पर कंक्रीट और ईंट का ढेर पड़ा हुआ था, लेकिन कोई हिंसक विरोध नहीं हुआ। दुकान मालिकों, जिनके प्रतिष्ठान ध्वस्त कर दिए गए थे, ने दावा किया कि एनडीएमसी ने उन्हें पूर्व सूचना दिए बिना अतिक्रमण अभियान शुरू किया।

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