संक्रामक… लेकिन घातक नहीं ओमिक्रॉन! जल्द लगेगी ये ‘ऐतिहासिक खुराक’

नई दिल्ली। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की बढ़ती सक्रियता को देखते हु  ए देश ही क्या पूरी दुनिया के विशेषज्ञ जांच-पड़ताल में जुटे हुए हैं। ऐसे में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट से जुड़ी कई ख़ास बातें भी पता चली हैं। अभी तक की जांच के बाद सामने आए प्रमाणों को देखने के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रॉन पुराने वैरिएंट डेल्टा के मुकाबले अधिक संक्रामक है और उससे अधिक तेजी से फैलेगा। मगर, इस बात से लोगों को जरा भी घबराने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन से बचाव करना ही एक बेहतर विकल्प होगा। बचाव के तहत किए जाने वाले कामों में कोविड की बूस्टर डोज लगवाना और साफ़-सफाई का ख्याल रखना काफी अहम है। वहीं सुरक्षात्मक दृष्टि से संक्रमितों से उचित दूरी बनाकर रखना भी बेहद जरूरी है। इतना ही नहीं एहतियात के तौर पर मास्क लगाना भी अनिवार्य बताया गया है, ताकि आप गलती से भी संक्रमण का शिकार न हों।

अब बात करें होने वाले जोखिम की तो विशेषज्ञों का मानना है कि अभी तक की रिपोर्ट से यह बात पता चली है कि ओमिक्रॉन से संक्रमित होने वाले लोगों में इसके बहुत ही हल्के लक्षण देखने को मिलेंगे। इसका अर्थ यह हुआ कि पुराने वैरिएंट के मुकाबले इससे जान का जाने का खतरा काफी कम है।

बताया जा रहा है कि अभी तक ओमिक्रॉन के करीब 415 केस सामने आए हैं। वहीं ख़ास यह है कि इसमें से अभी तक 115 मरीज पूरी तरह से रिकवर होकर घर वापस लौट चुके हैं।

वहीं ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को देखते हुए शनिवार को मोदी सरकार ने कोरना फ्रंटलाइन वर्कर को बूस्टर देने का फैसला लिया।

बता दें कि कोविड -19 वैक्सीन की दूसरी खुराक और बूस्टर डोज जिसे “एहतियाती खुराक” भी कहा जा रहा उसके बीच का अंतर नौ से 12 महीने तक हो सकता है।

वजह यह है कि टीकाकरण विभाग और टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की बात को लेकर चर्चा चल रही है।

वहीं कोविशील्ड और कोवैक्सिन में वर्तमान में उपयोग किए जा रहे टीकों के लिए अंतराल की बारीकियों पर काम किया जा रहा है, और इस पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में घोषणा की कि 15-18 वर्ष के बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत 3 जनवरी से होगी, जबकि फ्रंटलाइन वर्कर को 10 जनवरी से बूस्टर डोज लगाए जाएंगे। वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए ये फैसला लिया गया है।

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