‘भगौड़ों’ पर नकेल कसने के लिए भाजपा ने कसी कमर, तैयार किया ‘अभेद्य चक्रव्यूह’

लखनऊ। यूपी चुनावों की नजदीकियों के साथ ही भाजपा में मची उथल-पुथल और मंत्रियों व विधायकों की भगदड़ में सत्तारूढ़ भाजपा को इस विषय में सोचने को मजबूरे कर दिया है। यही वजह है कि भाजपा अब प्रदेश में अपनी धुरी को बनाए रखने के लिए हर जायज प्रयास करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा ने चुनावों से ठीक पहले पार्टी से भागने वाले मंत्री एवं नेताओं पर अपनी एक अलग रणनीति तैयार की है, जिससे पार्टी को पहुंचे नुकसान की भरपाई की जा सके।

खबरों के मुताबिक़ भाजपा का कहना है कि साल 2014, 2017 और 2019 के चुनाव में भाजपा ने जिस हिंदुत्व के एजेंडे को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक अलग मुकाम हासिल किया, उस छवि को तोड़ने की कोशिश जातीय समीकरणों के माध्यम से सपा कर रही है।

ऐसे में अब भाजपा ने भी पलटवार की तैयारी कर ली है। भाजपा के 20 हजार ओबीसी नेता घर-घर जाकर विपक्ष के एजेंडे की पोल खोलेंगे। इस्तीफा देने वाले नेताओं की सच्चाई बताएंगे। इसके लिए हर विधानसभा सीट पर 50-50 नेताओं की टीम का गठन किया गया है।

जानकारी के अनुसार यह बात निकल कर सामने आ रही है कि स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी और दारा सिंह चौहान जैसे मंत्री और अन्य विधायकों के इस्तीफे की सच्चाई को अब आम जनता तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और ओबीसी मोर्चा के प्रभारी दयाशंकर सिंह ने कहा है कि हम सभी विधानसभा सीटों पर तक पहुंचेंगे। सभी 403 विधानसभा सीटों पर 50-50 पिछड़ी जाति के नेताओं को पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की सच्चाई बताने के लिए लगाया जाएगा।

करीब 20,150 नेताओं को प्रदेश के हर घर तक पहुंच कर नेताओं की सच्चाई से अवगत कराने का निर्णय लिया गया है। इन लोगों ने निजी महत्वाकांक्षा में पार्टी छोड़ी है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं के बारे में क्षेत्र से फीडबैक सही नहीं था। टिकट कट सकता था। इस कारण पहले ही उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

वहीं इसी बीच बीते दिन यानी शुक्रवार को योगी आदित्यनाथ द्वारा एक दलित परिवार के घर खिचड़ी खाने को लेकर भी पार्टी ने मामला साफ़ किया है, ताकि इसे विपक्ष दलित वोट बैंक हासिल करने की रणनीति न करार दे। पार्टी का कहना है कि सीएम योगी गोरक्षपीठ के महंत भी हैं।

उन्होंने बताया कि इस पीठ के पूर्व महंत अद्वैतनाथ ने 80 के दशक में दलितों के घर मकर संक्रांति के दिन भोजन कर समाज में एकरूपता लाने की कोशिश शुरू की थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इसी परंपरा का पालन करते हुए ही मकर संक्रांति के दिन दलित परिवार के घर खिचड़ी प्रसाद ग्रहण किया। हालांकि, उनके दलित परिवार के भोजन को मीडिया में इस बार अधिक तबज्जो मिली।

इसके अलावा खबर यह भी है कि भाजपा ने इस्तीफों के बाद अब डैमेज कंट्रोल करना शुरू कर दिया है। सीएम योगी के दलित के घर भोजन को धार्मिक नियम का पालन कर यह साबित किया जा रहा है कि पार्टी के लिए हर वर्ग एक समान है। वहीं, प्रदेश भर में अब दलित और पिछड़े नेताओं को फ्रंट पर लाने की तैयारी कर ली गई है।

वहीं यह भी जानकारी है कि जिस प्रकार सपा या एनी विपक्षी दलों ने भाजपा के विधायकों को तोड़ने का प्रयास किया है, उसी पर पलटवार करते हुए अब भाजपा ने भी प्लानिंग की है कि किस तरह से विपक्षी दलों के उन नेताओं को अपने में मिलाया जाए जातिगत समीकरणों को नए आयाम देकर भाजपा के बल को बढ़ाने का काम कर सकते हैं।

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