बड़ी खबर! करहल से अखिलेश के खिलाफ भाजपा की कमान संभालेंगी अपर्णा?

लखनऊ। साल 2014 में जब पूर्ण समर्थन हासिल कर भाजपा ने केंद्र पर अपना कब्जा जमाया, तब से ही यह बात साफ़ हो गई कि देश में राजनैतिक महौल बनाने और उसे कैश कराने के मामले में भाजपा से बेहतर और कोई नहीं। शायद इसी का नतीजा रहा है कि साल 2014 से केंद्र में कब्जा जमाने के बाद भाजपा ने देश के करीब-करीब सभी राज्यों में भी अपना आधिपत्य जमा लिया। ऐसे में मौजूदा होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भी काफी कयास लगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब यह खबर निकल कर सामने आ रही है कि हाल ही में भाजपा में शामिल हुई मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव को भाजपा इन चुनावों में अखेलेश के समक्ष खड़ा कर सकती है।

दरअसल, हाल ही में अखिलेश यादव ने इस बात का ऐलान कर दिया था कि वह मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लगेंगे। वहीं आज यानी सोमवार को उनके इस सीट से नामांकन करने की भी खबर है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि भाजपा चुनावी माहौल बनाने के उद्देश्य से अपर्णा यादव को इसी सीट से मैदान में उतार सकती है।

हालांकि, मुलायम परिवार के विरासत वाली सीट मैनपुरी पर अपर्णा यादव के लिए चुनाव लड़ना आसान तो नहीं होगा, लेकिन दिलचस्प जरूर होगा। अपर्णा यादव का भले ही करहल में मुलायम परिवार की बहू होने के अलावा कोई दूसरा रिश्ता ना रहा हो, सामाजिक व राजनैतिक तौर पर करहल में सक्रिय ना रही हो, लेकिन चुनावी माहौल में संदेश देने की कोशिश में माहिर बीजेपी यह दांव खेल सकती है।

अपर्णा यादव के करहल से चुनाव लड़ने को लेकर फिलहाल अधिकारिक तौर पर निर्णय होना बाकी है। लेकिन अपर्णा यादव ने इतना जरूर कहा कि चुनाव लड़ना है, नहीं लड़ना है, कहां से लड़ना है वह पार्टी तय करेगी। पार्टी का जो निर्णय होगा वह मान्य होगा।

फिलहाल अभी इस मामले में भाजपा ने कोई भी आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। वहीं ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इसके विपरीत अभी भाजपा ने इस सीट से किसी उम्मीदवार को उतारने की घोषणा भी नहीं की है। वहीं भाजपा ज्वाइन करने के बाद अपर्णा ने भी यह कहते हुए साफ़ कर दिया था वह अपने परिवार के खिलाफ नहीं है, लेकिन वे मोदी और योगी की नीतियों से काफी प्रभावित हैं। यही कारण था कि उन्होंने भाजपा ज्वाइन की। इसी मौके पर उन्होंने यह भी कहा था कि वह किसी निश्चित सीट पर चुनाव लड़ने के प्रलोभन की वजह से भाजपा में नहीं आई हैं। हाँ, यह जरूर है कि यदि चुनाव लड़ने का मौक़ा मिला तो जहां से भी पार्टी उन्हें उतारना चाहगी, वे वहीं से चुनाव लड़ेंगी। यह पूरी तरह से पार्टी का फैसला होगा।

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