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UP में तेल कंपनियों की नीति से चीनी मिलों को बड़ा झटका, एथेनॉल के निर्यात पर छाए संकट के बादल

उत्तर प्रदेश में गन्ने का पेराई सत्र चालू होने वाला है,पर उससे पेहले ही चीनी मिलो को काफी बड़ा झटका मिला है। तेल कंपनियां एथेनॉल उत्पादन के लिए 26 राज्यों को प्रोत्साहित करते हुए खरीद करने जा रही हैं, इसमें यूपी शामिल नहीं है। यूपी में हर साल 100 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है, उसमें 40 करोड़ लीटर अन्य राज्यों में निर्यात होता रहा है। तेल कंपनियों की नीति से चीनी उद्योग पर खतरा मंडरा रहा है।

27 अगस्त को तेल कंपनियों ने एक्सप्रेशन आफ इंट्रेस्ट (ईओआइ) जारी करके एथनाल खरीद का करार के लिए टेंडर मांगा। इंडियन आयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड व हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से जारी हुए टेंडर में उन 26 राज्यों से 477.50 करोड़ लीटर खरीद का लक्ष्य तय किया गया है, जो गन्ना उत्पादन में काफी पिछड़े हैं। उत्तर प्रदेश का चीनी उद्योग उम्मीद संजोए था कि यूपी का लक्ष्य 100 करोड़ लीटर से अधिक होगा, जबकि उस सूची में उसका नाम तक नहीं है, महाराष्ट्र से भी केवल दो करोड़ लीटर खरीद होनी है।

यूपी शुगर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सीबी पटोदिया ने केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव शुगर को पत्र भेजकर सख्त नाराजगी जताई है। प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम व खाद्य मंत्रालय के अलावा प्रदेश के मुख्य सचिव, गन्ना आयुक्त आदि को पत्र भेजकर हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।

यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी दीपक गुप्तारा ने बताया कि प्रदेश में हर साल 100 करोड़ लीटर एथनाल तैयार हो रही है। राज्य में इसकी खपत करीब 60 करोड़ लीटर है। शेष पश्चिम बंगाल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, छत्तीसगढ़ आदि में भेजा जा रहे थे। इसके कारण लगभग 40 करोड़ लीटर एथनाल बर्बाद होगा। यूपी के चीनी उद्योग को करीब पांच हजार करोड़ का घाटा होने का अनुमान है।

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