नहीं संभले तो लगेगा लॉकडाउन! ये रिपोर्ट कर रही चौथी कोरोना लहर का दावा? वजह हैरान कर देगी

नई दिल्ली। एक बार फिर कोरोना संक्रमितों की संख्या ने जहां देश की जनता को दोबारा खौफ पैदा कर दिया है, वहीं चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस मामले पर अपनी चिंता जाहिर की है। दरअसल, बीएचयू के जीव विज्ञानी ने एक सीरो सर्वे किया, जिसमें यह पाया गया कि अब महज 17 फीसदी लोगों में ही कोरोना से जंग लड़ने की एंटीबॉडी बची है, जो कि काफी हैरान करने वाला है। वहीं अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के हिसाब से देखें तो 15 फीसदी लोगों को ही बूस्टर डोज लगी है। ऐसे में 70 फीसदी लोगों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा है।

खबरों के मुताबिक़ काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने 10 सर्वे किए हैं। इसके तहत 116 लोगों के सैंपल लिए गए। इस सैंपल में जो आंकड़े आए हैं उसके मुताबिक महज 17 फीसदी में ही एंटीबॉडी पाई गई है। 46 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी लगभग खत्म होने के कगार पर है। प्रोफेसर चौबे ने बताया कि अगर 70 फीसद से ज्यादा लोगों में एंटीबॉडी खत्म हो जाती है तो कोरोना के आंकड़े बढ़ने का खतरा है। ऐसे में दूसरे डोज के बाद प्रीकॉशन डोज को बढ़ाए जाने की जरूरत है।

जनवरी 2022 से कोविड वैक्सीन के प्रीकॉशन डोज की लगने की शुरुआत हुई थी। शुरुआती दौर में फ्रंटलाइन वर्कर, सुरक्षाकर्मी 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को ही ये डोज लगाई जा रही थी। वाराणसी के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के हिसाब से लगभग 4 महीने बीतने के बाद भी वाराणसी में प्रीकॉशन डोज की रफ्तार काफी धीमी है। वैक्सीन की दूसरी डोज लेने वालों की संख्या लगभग 76 फीसदी है।

वहीं प्रीकॉशन डोज लेने वालों की संख्या महज 15 फीसद पर ही सीमित रह गई है। वहीं 12 से 18 साल के बच्चों को वैक्सीनेशन देने की रफ़्तार बेहतर बताई जा रही है। अब तक करीब 77 फीसदी बच्चों को वैक्सीनेट किया जा चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और सीरो सर्वे के आंकड़ों की समानता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बूस्टर डोज देने के मामले में अभी विभाग को और तेजी लाने की जरूरत है।

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