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भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की आज तीसरी पुण्यतिथि। राजनीती से लेकर रचनाओं तक के क्षेत्र में थे निपुण

Author: Shraddha

मौत की उम्र क्या है ?

दो पल भी नहीं !

ज़िन्दगी सिलसिला,

आज कल की नहीं।

भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को युग प्रवर्तक बोलना उतना ही उचित है जितना सूर्य को रौशनी का जरिया मानना। राजनेता होने के साथ साथ एक जोशीले वक्ता और लेखक के रूप में लोक प्रचलित रहे। जहाँ एक तरफ प्रधान मंत्री बनकर देश की सेवा की तो वही दूसरी तरफ अपने विचारों एवं लेखों से समाज में परिवर्तन लाने का प्रयास। कभी न रुकने वाले जीवंत व्यक्ति न सिर्फ भारत रत्न रहे बल्कि पद्म विभूषण से भी नवाज़े गए। आखिर में अटल जी के देह त्यागने पर ही भारत में एक युग का अंत हो गया।

अटल जी का जन्म ग्वालियर जिले में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। अपनी पढ़ाई के ख़त्म होते ही उन्होंने राजनीती का दामन थाम लिया। कई वर्षों तक राजनीती में रहने के बाद अटल जी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सह-संस्थापक और वरिष्ठ नेता थे। वह पांच दशकों से अधिक समय तक भारतीय संसद के सदस्य रहे, दस बार लोकसभा, निचले सदन और दो बार राज्यसभा, उच्च सदन के लिए चुने गए।अपने राजनितिक दौर के चलते ही उन्होंने अपनी कविताएँ और लेख प्रकाशित किये। लगभग 20 किताबे लिखने के बाद उनकी सभी रचनाओं में सबसे प्रचलित “मेरी इक्यावन कविताएँ” है। वर्ष 2015 में भारत रत्न से नवाज़े गए तो वही 1992 में पद्म विभूषण का पुरस्कार अपने नाम किया।

राजनितिक जगत में देखा जाए तो 3 बार देश के प्रधान मंत्री बने और एक बार विदेश मंत्रालय को भी संभाला। हालाँकि दो बार अपना प्रधान मंत्री का कार्यकाल पूरा न कर पाए लेकिन वर्ष 1998 से 2004 तक एक पूर्ण कार्यकाल के लिए देश की सेवा करी। अटल जी ने पाकिस्तान और भारत के रिश्तों को सुधारने के लिए “सदा-ऐ-सरहद” ट्रैन चलवाई जिसके विपरीत भारत पकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध भी इन्हे के कार्यकाल में हुआ। वाजपेयी जी ने “अटल टनल” का निर्माण भी करवाया जो लेह जाने पर मनाली और केलोंग के लम्बे रस्ते को घटा देती है।

काफी लम्बे समय से बीमार चलने के बाद 11 जून 2018 को, वाजपेयी को गुर्दे में संक्रमण के बाद गंभीर स्थिति में एम्स में भर्ती कराया गया था। 16 अगस्त 2018 को 93 साल की उम्र में शाम 5:05 बजे उन्हें आधिकारिक तौर पर वहां मृत घोषित कर दिया गया था। इसी के साथ भारत में भारत रत्न और एक युग का अंत हो गया। अटल जी के काम, उनके लेख, उन्हें हमेशा जीवित रखेंगे। उन्ही की रचनाओं में से कुछ स्वर्ण अक्षर निम्नलिखित हैं – 

मै जी भर जिया

मै मन से मरूं

लौट कर आऊँगा 

कूच से क्यों डरु?!

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