पार्टी, पदयात्रा और लालू-नीतीश पर निशाना…जानें प्रशांत किशोर के फ्यूचर प्लान की ये बड़ी बातें

प्रशांत किशोर (पीके) ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों से उनका व्यू पॉइंट लेना। उनकी अपेक्षा और आकांक्षा को समझना जरूरी है। इसके लिए 2 अक्टूबर को चंपारण गांधी आश्रम से 3 हजार किमी की पदयात्रा करूंगा।

प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले 30 साल से बिहार में लालू ​जी और नीतीश कुमार का राज है। बिहार में लालू और नीतीश जी के शासन के बाद भी आज बिहार सबसे पिछड़ा राज्य है। विकास के ज्यादातर मानकों पर बिहार​ विकास के निचले पायदान पर है। पिछले 10-15 सालों में हम विकास के पथ पर जिस रास्ते और तरीके से आए हैं, उससे तो आने वाले डेढ़ दशक तक भी हम विकास के लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। इसके लिए नई सोच और प्रयास की जरूरत है।

सीएम नीतीश पर बोला हमला

प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार के रहते बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की व्यवस्था पूरी तरीके से ध्वस्त और नष्ट है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के साथ व्यक्तिगत तौर पर मेरे बहुत अच्छे संबंध है, मगर हर मुद्दे पर मैं उनसे सहमत नहीं हूं।

17-18 हजार लोगों से मिलेंगे

प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने बिहार में 17-18 हजार ऐसे लोगों की पहचान की है, जो समाजिक और राजनीतिक जीवन से जुड़े हैं। किशोर ने कहा, वे आने वाले समय में ऐसे लोगों से मुलाकात करेंगे। इन लोगों से मिलने के लिए वे घर घर जाएंगे। इन्हें जन सुराज की कल्पना के बारे में जानकारी देंगे और इससे उन्हें जोड़ने का प्रयास करेंगे। साथ ही इन लोगों के विचारों को सुनेंगे और उनकी अवधारणा को जन सुराज में लागू करने का प्रयास करेंगे।

प्रशांत किशोर ने किये दो बड़े ऐलान

1. पीके बोले कि अगले तीन से चार महीनों में मैं उन 17 हजार लोगों से मिलूंगा जिनको चिन्हित किया गया है। जो बिहार से जुड़े हैं और यहां बदलाव चाहते हैं। उनपर जन-सुराज पर बात होगी।इनमें से 2, 3 या 5 हजार लोग अगर एकसाथ मिलते हैं और तय करते हैं कि उनको किसी राजनीतिक पार्टी या मंच की जरूरत है। तो उसकी घोषणा तब की जाएगी। तब भी वह पार्टी प्रशांत किशोर की पार्टी नहीं होगी। वह उन सभी लोगों की पार्टी होगी जो राजनीतिक संगठन के निर्माण में भागीदारी देंगे।

 2. दूसरा बड़ा मुद्दा बिहार के गली-मोहल्ले तक पहुंचा, लोगों को जन-सुराज की परिकल्पना के बारे में बताना है, उनकी समस्याओं को सुनना है। इसके लिए 2 अक्टूबर से मैं खुद पश्चिमी चंपारण के गांधी आश्रम से 3 हजार किलोमीटर की पदयात्रा करूंगा।

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