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यूपी में नहीं बढ़ेंगी बिजली दरें, राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया टैरिफ ऑर्डर

Author: shivam gupta

यूपी विधानसभा चुनाव व कोरोना से पैदा हुए हालात को देखते हुए प्रदेश सरकार ने इस वर्ष भी बिजली दरें न बढ़ाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा और कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पिछले साल की तरह इस साल भी बिजली दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 2021-22 में मौजूदा दरें ही प्रभावी रहेंगी। यही नहीं पावर कॉर्पोरेशन की ओर से श्रेणियों के स्लैब में परिवर्तन तथा रेगुलेटरी एसेट के आधार पर दरों में 10-12 फीसदी तक की वृद्धि के प्रस्ताव को भी आयोग ने खारिज कर दिया है। दरों में वृद्धि न किए जाने की वजह आगामी विधानसभा चुनाव को भी माना जा रहा है।

विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों की ओर से 2021-22 के लिए दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर), 2020-21 की एनुअल परफार्मेंस रिव्यू, 2019-20 के लिए दाखिल ट्रू-अप (अनुमोदित व वास्तविक खर्च में अंतर) तथा स्लैब परिवर्तन याचिका पर बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाते हुए टैरिफ आर्डर जारी कर दिया। खास बात यह है कि 49 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के रेगुलेटरी एसेट का दावा करने वाली बिजली कंपनियों पर इस साल भी उपभोक्ताओं की करीब 1059 करोड़ रुपये की देनदारी निकल आई है। मौजूदा सरकार में अभी तक केवल एक बार वर्ष 2019-20 में बिजली दरों में बढ़ोतरी हुई है।

आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि सभी बिजली कंपनियों के गैप/सरप्लस की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पिछले साल की ही दरों को 2021-22 में जारी रखा गया है। साथ ही आयोग ने बिजली कंपनियों के टैरिफ श्रेणी व उपश्रेणी (स्लैब) को तर्कसंगत बनाने तथा रेगुलेटरी एसेट के प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया है।

71964 करोड़ एआरआर अनुमोदित
नियामक आयोग ने 2021-22 के लिए बिजली कंपनियों की तरफ से दाखिल 81,901.24 करोड़ रुपये एआरआर की जगह 71963.91 करोड़ रुपये ही अनुमोदित किया है। इसी तरह बिजली कंपनियों ने 16.64 प्रतिशत वितरण लाइन हानियों के आधार पर एआरआर प्रस्ताव दाखिल किया था जिसे आयोग ने कम करते हुए मात्र 11.08 प्रतिशत ही अनुमोदित किया है। इससे बिजली कंपनियों पर 2021-22 में फिर उपभोक्ताओं की लगभग 1059 करोड़ रुपये की देनदारी निकल रही है। आयोग  ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि बिलिंग व राजस्व वसूली में अक्षमता से होने वाले घाटे को एआरआर में अनुमोदित नहीं किया गया है। इससे ईमानदार उपभोक्ता हतोत्साहित होते हैं और बकायेदारों को बिल जमा न करने के  लिए प्रोत्साहन मिलता है। आयोग का कहना है कि 2020-21 के मुकाबले इस साल क्रास सब्सिडी सरचार्ज (सीएसएस) कम किया गया है।

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